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उन्नाव ARTO में भ्रष्टाचार का महाखुलासा!

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दलालों के दम पर चल रहा पूरा खेल?

 

तनिश सिंह
उन्नाव।
उत्तर प्रदेश सरकार जहां परिवहन विभाग में पारदर्शिता और दलालों पर रोक लगाने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही है, वहीं उन्नाव स्थित सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय (ARTO) एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आरटीओ कार्यालयों से दलालों को पूरी तरह खत्म करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद उन्नाव एआरटीओ कार्यालय में कथित रूप से बाहरी दलालों की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि एआरटीओ कार्यालय में कुछ बाहरी व्यक्ति स्वयं को अधिकारियों का करीबी या अर्दली बताकर सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। शिकायतों में यह भी दावा किया गया है कि इन लोगों की मौजूदगी में सरकारी रिकॉर्ड रूम तक प्रभावित हुआ और कई वाहन संबंधी फाइलें गायब होने की बात सामने आई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह सब अधिकारियों के संरक्षण में हो रहा है।कार्यालय के डेटा एंट्री ऑपरेटर शिव सिंह ने आरोप लगाया है कि जनवरी 2026 से जून 2026 के बीच बड़ी संख्या में ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों तथा बिना निर्धारित प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी किए जारी किए गए। उन्होंने इस पूरे मामले में एआरटीओ श्वेता वर्मा, वरिष्ठ लिपिक अमिता तिवारी, शुभम देव तिवारी सहित विभाग के कई कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप लगाया है।इन आरोपों के सामने आने के बाद एआरटीओ कार्यालय की ओर से पत्रकार वार्ता आयोजित कर डेटा एंट्री ऑपरेटर शिव सिंह को कथित फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र के आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के आरोप में सेवा से निष्कासित करने की जानकारी दी गई।मामले में नया मोड़ तब आया जब सामने आए निष्कासन आदेश में दर्ज तारीख को लेकर विवाद खड़ा हो गया। एआरटीओ का दावा है कि शिव सिंह को 17 जून 2026 को ही हटाया गया था, जबकि वायरल निष्कासन आदेश में कथित रूप से अगस्त माह की तारीख दर्ज होने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस विरोधाभास ने पूरे मामले पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।एआरटीओ कार्यालय का दावा है कि कार्यालय में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश प्रतिबंधित है। इसके विपरीत शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कार्यालय परिसर में कुछ बाहरी लोग खुलेआम सक्रिय रहते हैं और परिवहन विभाग के विभिन्न कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं।

ARTO में तैनात आरआई के रूम में घूसे बाहरी दलाल
दफ्तर के अंदर दलालों की धमाचौकड़ी

आरोप है कि मोहित तिवारी तथा अमृतेश यादव नामक दो व्यक्ति लंबे समय से कार्यालय में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और विभिन्न सरकारी कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस, वाहन ट्रांसफर सहित विभिन्न कार्यों के नाम पर प्रतिदिन लाखों रुपये की अवैध वसूली की जाती है और इसका लाभ विभाग के कुछ अधिकारियों तक पहुंचता है। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 2017 की उस कार्रवाई का भी उल्लेख किया है, जब जिला प्रशासन की छापेमारी में 24 कथित दलालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उनका कहना है कि यदि एक बार फिर निष्पक्ष जांच और छापेमारी कराई जाए तो वर्तमान स्थिति भी स्पष्ट हो सकती है।शिकायत में वर्ष 2024 के उस मामले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें दो मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों पर कथित रूप से मानकों से अधिक प्रारूप-5 (Form-5) प्रमाणपत्र जारी करने के आरोप लगे थे। जांच के बाद दोनों संस्थानों के लाइसेंस निरस्त किए गए थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बाद में संबंधित लोगों ने अपने परिजनों के नाम पर पुनः संस्थान संचालित कर लिए और अनियमितताएं जारी रहीं।

सीएम का सख्त फरमान

परिवहन मंत्री की चुप्पी पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लगातार शिकायतों और गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक उच्च स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तो परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

 

 

नोट: इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप शिकायतकर्ताओं एवं संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि संबंधित विभाग या अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।