
तनिश सिंह
उन्नाव। शिक्षा विभाग में आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण के नाम पर कथित वसूली और फर्जी शिकायतों का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। मामले में अब प्रधानाध्यापिका शिखा पाण्डेय का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसी में तैनात कर्मचारियों और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी द्वारा जांच समिति गठित की गई है। हालांकि जांच की प्रक्रिया धीमी होने के बीच सामने आए नए आरोपों ने शिक्षा विभाग में हलचल बढ़ा दी है। आरोप है कि उन्नाव के नवाबगंज खंड शिक्षा कार्यालय क्षेत्र में आईजीआरएस के माध्यम से अलग-अलग नामों से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई गईं। शिकायतों की जांच और उनके निस्तारण के नाम पर शिक्षकों से कथित तौर पर 20 हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक की रकम मांगे जाने और वसूली किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन शिकायतों में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की जांच की जाए तो एक ही नंबर से अलग-अलग नामों से शिकायतें दर्ज होने का मामला सामने आ सकता है।
इसी कथित फर्जी शिकायतों के मामले में सराय इंदल प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शिखा पाण्डेय का नाम भी सामने आया है। प्रधानाध्यापिका के पति अश्वनी मिश्रा ने मामले को लेकर अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए कथित फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेज सामने रखे हैं। उनका दावा है कि उन्हें दो अलग-अलग पत्र प्राप्त हुए, जिनके क्रमांक और तारीख को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।अश्वनी मिश्रा के मुताबिक पहला पत्रांक 206 दिनांक 29 मई 2026 का है, जिसमें सत्र 2025-26 का उल्लेख बताया गया है। उनके अनुसार इस पत्र में खंड शिक्षा अधिकारी का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं था। इसके बाद 20 जून 2026 को दूसरा पत्र जारी किया गया, जिसमें पहले पत्रांक 206 का हवाला देते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई। आरोप है कि इस दूसरे पत्र में सत्र 2026-27 का उल्लेख किया गया और खंड शिक्षा अधिकारी शुचि गुप्ता का नाम प्रमाणित रूप से दर्ज मिला। इन दोनों पत्रों के बीच के अंतर को लेकर शिकायतकर्ता ने जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से इस पूरे मामले में खंड शिक्षा अधिकारी शुचि गुप्ता, दीपेश कुमार और बीआरसी में तैनात लेखाकार प्रवीण श्रीवास्तव सहित अन्य कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। मामले को लेकर अश्वनी मिश्रा ने जिलाधिकारी उन्नाव के समक्ष उपस्थित होकर शिकायत और दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद जिलाधिकारी घनश्याम मीणा की ओर से मामले की जांच के लिए समिति गठित किए जाने की बात सामने आई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के लिए पर्याप्त समय बीत जाने के बावजूद कार्रवाई की गति अपेक्षाकृत धीमी है और पूरे मामले में लीपापोती किए जाने की आशंका बनी हुई है।
अब इस मामले में प्रधानाध्यापिका शिखा पाण्डेय का बयान सामने आने के बाद आरोपों ने और गंभीर रूप ले लिया है। प्रधानाध्यापिका ने अपने बयान में खंड शिक्षा अधिकारी दीपेश कुमार, बीआरसी में तैनात कर्मचारियों और बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार पाण्डेय की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ शिकायतों और विभागीय कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि शिकायतें किस माध्यम से और किन लोगों द्वारा दर्ज कराई गईं।मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि एक ही मोबाइल नंबर से अलग-अलग नामों पर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं तो उनके पीछे कौन लोग हैं और शिकायतों के आधार पर शिक्षकों पर दबाव बनाने या कथित वसूली का प्रयास किया गया या नहीं। इसके अलावा सामने आए विभागीय पत्रों की तारीख, क्रमांक, सत्र और अधिकारियों के नामों में कथित अंतर की भी जांच की आवश्यकता है।
शिक्षा विभाग से जुड़े इस मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आईजीआरएस व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों और कर्मचारियों की शिकायतों का पारदर्शी तरीके से निस्तारण करना है। ऐसे में यदि किसी शिकायत प्रणाली का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया है तो यह गंभीर विषय माना जाएगा। वहीं यदि लगाए गए आरोप गलत पाए जाते हैं तो शिकायतों के पीछे जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच होना जरूरी होगा।फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है। जांच समिति द्वारा दस्तावेजों, शिकायतों, मोबाइल नंबरों, पत्रावलियों और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के बयानों की जांच किए जाने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। प्रधानाध्यापिका के बयान के बाद अब विभागीय अधिकारियों पर भी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।