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पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त

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PARDARSHI VIKASH NEWS इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए रखना पहले दिए गए आदेशों का उल्लंघन है और इसे अदालत की अवमानना की श्रेणी में माना जा सकता है। अदालत ने सरकार से ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और पंचायत चुनाव कराने की स्पष्ट समयसीमा हलफनामे के साथ प्रस्तुत करने को कहा है।सहारनपुर निवासी अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि 25 और 26 मई 2026 के आदेश पहले ही असंवैधानिक घोषित किए जा चुके हैं। इसलिए प्रधानों को प्रशासक के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि फिलहाल कोर्ट ने किसी तरह की अंतरिम रोक नहीं लगाई है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। यदि सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती है तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है।सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि मतदाता सूची 10 जून को प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। चुनाव प्रक्रिया केवल राज्य सरकार की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध न होने के कारण रुकी हुई है।हाईकोर्ट के रुख के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अदालत ने सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वहीं सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए गठित ओबीसी आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही है।