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कायस्थ समाज ने प्रतिनिधित्व न मिलने पर जताई चिंता

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पारदर्शी विकास न्यूज़ बांदा। उत्तर प्रदेश में आगामी शिक्षक एवं स्नातक एमएलसी (डस्ब्) चुनावों को लेकर कायस्थ समाज में राजनीतिक उपेक्षा के चलते असंतोष तेजी से बढ़ रहा है। राजनीतिक दलों द्वारा घोषित की गई शुरुआती सूचियों में कायस्थ उम्मीदवारों की कमी पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने गहरी चिंता व्यक्त की है। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (चित्रकूट मण्डल) के मण्डल प्रभारी धीरज श्रीवास्तव ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, ष्कायस्थ समाज की पहचान हमेशा से शिक्षा, प्रशासन, न्यायिक व्यवस्था और बौद्धिक नेतृत्व में अग्रणी रही है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक प्रशासनिक ढांचे के निर्माण में इस समाज का अद्वितीय और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल द्वारा समाज के इस बौद्धिक वर्ग की अनदेखी करना न्यायसंगत नहीं है। धीरज श्रीवास्तव ने आगे कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर वर्ग की निर्णय प्रक्रिया और नीति निर्धारण में सीधी भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। कोई भी प्रबुद्ध समाज लंबे समय तक केवल श्मूक समर्थकश् बनकर नहीं रह सकता।  प्रयागराज और झांसी समेत पूरे उत्तर प्रदेश में कायस्थ समाज की मजबूत ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षणिक उपस्थिति रही है। यदि राजनीतिक दलों द्वारा आने वाली सूचियों में इस समाज को उचित और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया, तो यह बढ़ता हुआ असंतोष एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को जन्म दे सकता है। अंत में मण्डल प्रभारी ने शीर्ष नेतृत्व से अपील करते हुए कहा, ष्मेरा स्पष्ट मानना है कि ऐसी अप्रिय परिस्थितियां उत्पन्न न हों, इसके लिए समय रहते भारतीय जनता पार्टी (ठश्रच्) के शीर्ष नेतृत्व को इस गंभीर विषय पर आत्ममंथन और विचार अवश्य करना चाहिए, ताकि समाज के विश्वास को अक्षुण्ण रखा जा सके।