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जंगली तेंदुए के हमले से गैसड़ी में 87भेड़ों की मौत

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 बसपा प्रतिनिधि मंडल ने किया कस्बे का दौरा, पीड़ित परिवार से मुलाकात की

पारदर्शी  विकास न्यूज़  लखनऊ। जनपद बलरामपुर में गैसड़ी में जंगली तेंदुए के हमले से 87भेंडों की मौत की घटना पर बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्व नाथ पाल ने गहरा दुःख जताया है और जिला प्रशासन से समुचित कार्रवाई कर पीड़ित परिवार की मदद की मांग की है। घटना की जानकारी होने पर प्रदेश अध्यक्ष ने बसपा प्रतिनिधि मंडल  भेजकर पूरी घटना की जानकारी ली।
 जनपद बलरामपुर, विधानसभा गैसड़ी, नगर पंचायत गैसड़ी, वार्ड नं. 10 खदगौरा से अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। पाल समाज के बेटे श्री कन्हैया पाल एवं श्री विजय पाल के पारंपरिक व्यवसाय एवं रोजी-रोटी के साधन भेड़ों पर जंगली तेंदुए ने उनके बाड़ें में घुसकर हमला कर दिया।प्राप्त सूचना के अनुसार, इस दर्दनाक घटना में अब तक 87 भेड़ों की तत्काल मृत्यु हो गई है, जबकि 13 भेड़ें गंभीर रूप से घायल हैं। इस घटना से दोनों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।सबसे चिंतनीय विषय यह है कि स्थानीय प्रशासन मामले की गंभीरता को समझने के बजाय घटना में भेड़ों की मृत्यु का जिम्मेदार कुत्तों को बता रहा है, जो बेहद गैर-जिम्मेदाराना और बचकाना बयान है। प्रशासन को मामले की निष्पक्ष एवं गंभीरता से जांच कर वास्तविक कारणों का पता लगाना चाहिए।घटना की सूचना मिलने पर बहुजन समाज पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों को भेड़ पालक परिवारों के घर भेजकर घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई। साथ ही उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से फोन पर वार्ता कर मामले को गंभीरता से लेने तथा पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत एवं उचित मुआवजा उपलब्ध कराने की सलाह दी गई।शासन से मेरी स्पष्ट मांग है कि दोनों पीड़ित परिवारों की आजीविका का साधन पूरी तरह नष्ट हो गया है। अतः दोनों परिवारों को कम से कम 1-1 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा घायल भेड़ों के उपचार की समुचित व्यवस्था कराई जाए।बसपा प्रतिनिधि मंडल में बसपा देवी पाटन मंडल के मुस्लिम समाज सामाजिक भाईचारा कमेटी के संयोजक मो इरफान, मंडल प्रभारी पुजारी गौतम,अभय राव, रामफेर गौतम,अबारक उल्लाह, रमाकांत भारती आदि शामिल रहे।मो इरफान ने बताया कि जंगली जानवर तेंदुआ रात के दूसरे पहर आया था, उसके हमले से 87भेड़ों की  मौत हुई है और 13भेडें घायल हैं। दोनों परिवारों के पास कुल150भेंडें थी। भेड़पालन ही दो परिवारों की रोजी रोटी का सहारा है।