
Pardarshi Vikas News New Delhi/Kolkata
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई हुई। मामला जनवरी में कोलकाता स्थित राजनीतिक परामर्श कंपनी I-PAC के दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर पड़ी ईडी रेड से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने भाजपा पर कोर्ट की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। वहीं बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अदालत की कार्यवाही को चुनिंदा राजनीतिक दल प्रचार के माध्यम के रूप में उपयोग कर रहे हैं, जिस पर रोक लगनी चाहिए।
इससे पहले बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यदि कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय जांच एजेंसी की चल रही कार्रवाई में हस्तक्षेप करता है, तो इसे सामान्य केंद्र-राज्य विवाद नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा था कि संविधान निर्माताओं ने शायद ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की होगी।
ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि ईडी को जांच का मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं है, वह केवल वैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाली एजेंसी है। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी के कार्य में व्यवधान को लोकतंत्र या संवैधानिक संकट के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
दरअसल 8 जनवरी को ईडी ने कोलकाता में I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर छापा मारा था। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और कुछ दस्तावेज साथ ले गईं। इसके बाद ईडी ने जांच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
यह मामला कथित 2,742 करोड़ रुपये के कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि हवाला के जरिए करीब 20 करोड़ रुपये I-PAC तक पहुंचाए गए।
I-PAC पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली चुनावी रणनीतिकार संस्था मानी जाती है। 2021 विधानसभा चुनाव से लेकर मौजूदा चुनावी तैयारियों तक तृणमूल कांग्रेस के लिए संगठन, डेटा प्रबंधन, बूथ रणनीति और प्रचार अभियान में इसकी बड़ी भूमिका बताई जाती है। मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट महत्वपूर्ण निर्देश दे सकता है।