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हादसे के बाद जागा सिस्टम!

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अवैध निर्माण और अनदेखे नियमों पर अब कार्रवाई क्यों?

पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने काकादेव कोचिंग मंडी में बड़ी कार्रवाई करते हुए 30 से अधिक कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया। जांच में कई जगह आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।केडीए की चार टीमें लगातार क्षेत्र में एक-एक भवन की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है। बिना फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास और स्वीकृत मानचित्र के संचालित संस्थानों पर कार्रवाई जारी रहेगी।हालांकि इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिर प्रशासन को हर बार किसी हादसे, किसी चीख और किसी की जान जाने के बाद ही नियमों की याद क्यों आती है?जब अवैध निर्माण हो रहे थे, जब फायर एनओसी की अनदेखी की जा रही थी और जब नियमों का उल्लंघन खुलेआम हो रहा था, तब जिम्मेदार विभागों की निगरानी कहां थी?शहरवासियों का कहना है कि हादसे के बाद सीलिंग और कार्रवाई करना आसान है, लेकिन असली जिम्मेदारी हादसा होने से पहले उसे रोकने की है। अगर समय रहते निरीक्षण और सख्त कार्रवाई हो तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।अब सवाल यह भी है कि क्या सील किए गए संस्थान कुछ समय बाद फिर से खुल जाएंगे या इस बार व्यवस्था में स्थायी बदलाव होगा? जनता जवाबदेही चाहती है कि कार्रवाई सिर्फ हादसे के बाद नहीं, बल्कि पहले से जमीन पर दिखाई दे।

"लखनऊ की घटना के बाद कानपुर में छात्रों की सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। काकादेव क्षेत्र में सभी कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की जांच की जा रही है। जिन भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकास या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण मिला है, उनके खिलाफ सीलिंग समेत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्थिति में छात्रों और आम लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।" — केडीए सचिव अभय पांडेय