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बुद्धं सरणं गच्छामि --के संदेश के साथ निकली दस दिवसीय धम्म पद यात्रा

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पारदर्शी विकास न्यूज़ सारनाथ।  भगवान बुद्ध के संदेशों को गांव गांव पहुंचाने के लिए रविवार को बौद्ध भिक्षु भंते चंदिमा महाथेरो के मार्गदर्शन में दस दिवसीय धम्म पद यात्रा शुरू हुई। सातवें दिन धम्म यात्रा में दो सौ से अधिक बौद्ध भिक्षु और उपासक -उपासिकाएं शामिल हुए।  बुद्धं सरणं गच्छामि --के संदेश के साथ लहरतारा कबीर मठ से शुरू हुई और लगभग दस किलोमीटर भ्रमण के बाद वापस अशोका इन्स्टीट्यूट वाराणसी पहुंची । विश्राम के बाद लगभग चार बजे धम्मदेशना कार्यक्रम शुरू हुआ जो देर शाम तक चलता रहा। सातवें दिन का भोजन दान अशोका इन्स्टीट्यूट के प्रबंधक अनिल मौर्य की ओर से किया गया। प्राचीन बुद्ध विहार सोइया,गंगौली और अम्बेडकर सेवा समिति की ओर से फूलचंद्र बौद्ध और ललित कुमार धम्म चारिक (पद यात्रा) में शामिल हुए। भंते चन्दिमा महाथेरो ने कहा कि भगवान बुद्ध अपने जीवन काल में हजारों भिक्षुओं के साथ पैदल भ्रमण करते थे ‌और लोगों को प्रवज्या प्रदान करते थे।आज दुनिया में मानवता संकट में है। आतंक, युद्ध और हिंसा के माहौल ने दुनिया के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे परिवेश में भगवान बुद्ध के शांति, अहिंसा, करूणा और मैत्री के संदेश पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं। मैत्री भाव बौद्ध धम्म का मूल है। सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता इंजीनियर एस पी राम, अरविंद कुमार मौर्य,आर के प्रसाद,नंद किशोर,पी राम, छेदीलाल, डॉ रश्मि,आर डी प्रसाद, सुनील कुमार,रामदरश,वी एल निगम, प्रेम शंकर, प्यारे लाल आदि धम्म पद यात्रा में शामिल रहे।

कोट
संविधान निर्माता द्वितीय बोधिसत्व बाबा साहब डॉ अम्बेडकर ने बौद्ध मय भारत के निर्माण के संदेश दिए थे। धम्म पद यात्रा का उद्देश्य भगवान बुद्ध की वाणी और बौद्ध धम्म की शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाना है ।नये उपासक ,उपासिकाओं‌ को गुरु जी की ओर से दीक्षा भी प्रदान की जाएगी। भंते डा सी पी गौतम ,सारनाथ