
PARDARSHI VIKASH NEWS उन्नाव। एआरटीओ कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले में नया मोड़ सामने आया है। एआरटीओ स्वेता वर्मा अपने ही बयानों को लेकर सवालों के घेरे में आ गई हैं। मामला डेटा एंट्री ऑपरेटर शिव सिंह के निष्कासन से जुड़ा है, जिसकी तारीख को लेकर विरोधाभास सामने आया है।स्वेता वर्मा का दावा है कि उन्होंने डेटा एंट्री ऑपरेटर शिव सिंह को 17 जून 2026 को ही सेवा से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, निष्कासन आदेश पत्र में दर्ज तारीख को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि पत्र में 17 अगस्त 2026 की तारीख अंकित है, जो कथित निष्कासन की तिथि से लगभग दो माह बाद की है।इस विरोधाभास ने एआरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और निष्कासन आदेश की वास्तविकता पर गंभीर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।गौरतलब है कि डेटा एंट्री ऑपरेटर शिव सिंह ने एआरटीओ स्वेता वर्मा समेत विभाग के कई लोगों पर फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों के आधार पर तथा बिना निर्धारित प्रशिक्षण के कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि स्वेता वर्मा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया था।अब निष्कासन आदेश की तारीख को लेकर सामने आए इस नए विवाद ने पूरे मामले को और अधिक चर्चित बना दिया है। यदि दस्तावेजों में दर्ज तिथियों में विरोधाभास की पुष्टि होती है तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर सकता है। मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी कोई नया आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
