
पारदर्शी विकास न्यूज़ बांदा। जनपद के ग्राम मवई बुजुर्ग के प्रभावित किसानों एवं ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद द्वारा संचालित “भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना संख्या-2, बांदा” के भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं एवं जनविरोधी कार्यप्रणाली का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में 07 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी के माध्यम से आपत्तियां प्रस्तुत की गई थीं, लेकिन विभाग द्वारा उनकी बातों पर समुचित विचार नहीं किया गया। अब धारा-30 के अंतर्गत आपत्तियों की सुनवाई के लिए 16 जुलाई 2026 को शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर राजा देवी पैलेस, नरैनी रोड को बैठक स्थल बनाया गया है, जबकि अधिग्रहण स्थल के निकट ही मैरिज हॉल, पंचायत भवन एवं सर्किट हाउस जैसी उपयुक्त सरकारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रभावित किसानों का आरोप है कि बैठक को दूरस्थ स्थान पर आयोजित करने का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी को सीमित करना है। उनका कहना है कि वर्तमान कृषि कार्य एवं वर्षा ऋतु के कारण अधिकांश किसान इतनी दूर पहुंचने में असमर्थ रहेंगे, जिससे उनकी आपत्तियों का प्रभावी ढंग से प्रस्तुतिकरण नहीं हो सकेगा। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पिछले लगभग नौ माह में विभाग द्वारा प्रभावित परिवारों के साथ कोई सार्थक संवाद स्थापित नहीं किया गया और न ही उनकी प्रमुख मांगों पर विचार किया गया। प्रभावित लोगों की मांग है कि पूरे प्रभावित क्षेत्र को एक साथ रखते हुए अलग सेक्टर में शामिल किया जाए तथा अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनाई जाए। मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में प्रमुख मांगें हैं। जिनमें अधिग्रहण स्थल के निकट खुली एवं सार्वजनिक बैठक आयोजित की जाए। पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग कराई जाए।मीडिया को बैठक में आमंत्रित किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।मुआवजा निर्धारण एवं दरों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए।प्रभावित संपत्तियों एवं निर्माणों का निष्पक्ष मूल्यांकन कर उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर जनहित में आवश्यक कार्रवाई करने तथा प्रभावित किसानों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।