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60 दिन में कमाई, मिट्टी की उर्वरा भी बढ़ाई

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 प्रगतिशील महिला किसान कमला गुप्ता ने बताई मूँग की खेती की सफलता

पारदर्शी विकास ब्यूरो कसया (कुशीनगर)। कसया तहसील क्षेत्र के गबकनहा गांव की प्रगतिशील महिला किसान कमला गुप्ता ने किसानों को मूँग की खेती अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि यह फसल कम समय में अच्छा मुनाफा देने के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।अपने खेत में मूँग की तुड़ाई करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने मार्च माह में सम्राट प्रजाति की मूँग की बुवाई की थी, जो 60 से 65 दिनों में तैयार हो गई। इस फसल से प्रति एकड़ 6 से 7 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि मूँग की जड़ों में बनने वाली गांठों में मौजूद लाभकारी जीवाणु वातावरण की नाइट्रोजन को भूमि में स्थिर करते हैं, जिससे खेत की उर्वरता बढ़ती है और यह प्राकृतिक हरी खाद का भी कार्य करती है।कमला गुप्ता ने कहा कि देश में दालों की बढ़ती मांग के बावजूद किसान पर्याप्त मात्रा में दलहनी फसलों की खेती नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण विदेशों से दाल आयात करनी पड़ रही है। उन्होंने किसानों से फरवरी-मार्च में गन्ने की फसल के साथ उर्द या मूँग की सहफसली खेती करने की अपील की। इससे खरपतवार कम होंगे, अतिरिक्त आय होगी, उत्पादन लागत घटेगी और मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधरेगी।उन्होंने बताया कि मूँग पोषण का भी बेहतरीन स्रोत है। 100 ग्राम मूँग में लगभग 22 से 24 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि लगभग 100 ग्राम (दो अंडों) में करीब 12 ग्राम प्रोटीन मिलता है। अंकुरित मूँग स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है और आसानी से पच जाती है।कमला गुप्ता ने बताया कि उनके पुत्र डा. आलोक कुमार गुप्ता, जो भारत सरकार में कृषि वैज्ञानिक हैं, समय-समय पर उन्हें वैज्ञानिक खेती के संबंध में सलाह देते हैं। उन्होंने कहा कि मूँग की कटाई के बाद उसी खेत में मड़ुआ की रोपाई करेंगी, जिससे खेत का बेहतर उपयोग और अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।