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राज्य सभा के प्रत्याशी घोषित कर भाजपा ने सपा के पीडीए की हवा निकाली, सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश

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स्मृति ईरानी का सूची में नाम न होने से समर्थकों को निराशा


अमेठी। भारतीय जनता पार्टी की ओर से राज्य सभा के चुनाव के लिए घोषित प्रत्याशियों की सूची उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुर्खियों में है। भाजपा ने नये चेहरों और पार्टी कैडर को मौका देकर जहां विधानसभा चुनाव के पहले सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है वहीं समाजवादी पार्टी के पीडीए की हवा निकाल दी है। भाजपा की सूची में ब्राह्मण, राजपूत, ओबीसी, दलित और महिला सभी शामिल हैं। पूर्व डीजीपी बृजलाल को रिपीट करने के बजाय भाजपा ने रावत और पासी समाज पर दांव लगाया है। गीता शाक्य की जगह श्रुति गंगवार को मौका दिया गया है।  भाजपा के बृजलाल,हरदीप सिंह पुरी,बी एल वर्मा, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, डॉ दिनेश शर्मा, नीरज शेखर, अरूण सिंह के अलावा सपा के प्रोफेसर राम गोपाल यादव का कार्यकाल 25नवम्बर को खत्म हो रहा है। भाजपा ने जहां उत्तर प्रदेश के पार्टी नेताओं को सामाजिक और जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी घोषित किया है, वहीं समाजवादी पार्टी ने एक उद्योगपति को प्रत्याशी बनाया है।दूसरा नाम प्रोफेसर डॉ राम गोपाल यादव है, जिनके लिए कहा जाता है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव के परिवार से काफी लम्बे समय से उनके लिए राज्य सभा की सीट आरक्षित की हुई है। कोई दूसरा यादव और ओबीसी सपा के लिए कोई मायने नहीं रखता। इसके पहले विधानपरिषद चुनाव में भी सपा ने अपने पीडीए के फार्मूले को स्वयं खारिज करके प्रत्याशी बनाए थे। राज्य सभा के लिए पूर्व मंत्री स्मृति ईरानी का नाम काफी चर्चा में था। भाजपा नेतृत्व ने फिलहाल उनको मौका नहीं दिया। स्मृति ईरानी की टीम खासकर अमेठी में उनके समर्थकों को झटका लगा है। समर्थक पावर न  बढने से निराश हैं। भाजपा ने लोध समाज में पैठ मजबूत करने के लिए धर्मपाल सिंह को राज्य सभा भेजने का निर्णय लिया है। पूर्व एम एल सी विद्या सागर सोनकर, प्रदेश महामंत्री राम प्रताप सिंह, पूर्व सांसद प्रियंका रावत,राधा कांत ओझा,गोपी कृष्ण पांडेय, श्रुति गंगवार और प्रकाश पाल को प्रत्याशी बनाया है। बहुजन समाज पार्टी के बाद भारतीय जनता पार्टी में ही कैडर का सम्मान है। बसपा जब भी पावर में रही है उसने विधान परिषद और राज्य सभा में हमेशा पार्टी के कैडर कार्यकर्ताओं को ही भेजा है।2012के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बसपा के ओबीसी वोट बैंक में मजबूत सेंध लगाई है और अब बसपा के पैटर्न पर ही सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए ब्राह्मण, राजपूत, ओबीसी, दलित और महिला प्रत्याशी घोषित किए हैं। पूर्व डीजीपी बृजलाल को राज्य सभा के लिए रिपीट न करने से कोरी समाज के लोगों को खासी निराशा हुई है। दलित समाज के सामाजिक समूहों में कल तक सोशल मीडिया पर उनको राज्य सभा दूसरी बार भेजने की चर्चा थी। राज्य सभा के लिए 16अक्टूबर को मतदान होना है। सपा ने अभी तक तीसरे उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है। बसपा  के विधानसभा सदस्य शून्य होने से वह इस लड़ाई से बाहर है, कांग्रेस ने भी फिलहाल कोई प्रत्याशी नहीं घोषित किया है।