
अमेठी।
राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष और दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री डॉ सुनील कुमार विश्वकर्मा ने कहा है कि कला, संस्कृति और संस्कार को एक साथ लेकर चलने से ही नयी पीढ़ी को संस्कारवान बनाया जा सकता है ।जेन जी का नैरेटिव युवाओं के भविष्य और भारतीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। राज्य ललित कला अकादमी कलाकारों के संवर्धन के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
ऐसे कलाकार जिनकी ओर से बनाए गए भगवान राम के रेखाचित्र के आधार पर अयोध्या के श्री राम मंदिर में मूर्ति का निर्माण किया गया,काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग के प्रोफेसर और राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष/दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सुनील कुमार विश्वकर्मा शनिवार को सेपिएन स्कूल में आयोजित कला संस्कृति के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। डाक-बंगले में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य ललित कला अकादमी कलाकारों के संवर्धन में लगी हुई है। कलाकारों के कैम्प लगाकर उनके चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं लोक कल्याण का माध्यम है।कला और संस्कृति समाज को दिशा देती है। आज की युवा पीढ़ी जो जैन जी के नाम पर दिग्भ्रमित है, उसे संस्कारों से जोड़ने का काम कला ही कर सकती हैं।कला संस्कृति समाज को जोड़ने का काम करती है। धर्म के नाम पर अलगाव और नफ़रत के माहौल को राष्ट्रीय एकता के लिए घातक बताया और कहा कि किसी भी कार्यक्रम से किसी भी धर्म और आस्था को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए। डाक-बंगले में भारतीय जनता पार्टी के नेता अजय विश्वकर्मा के संयोजन में उन्होंने विश्वकर्मा समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और रेलवे स्टेशन के पास स्थित प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर के दर्शन भी किए।
डाक बंगले में अजय विश्वकर्मा के साथ डा जे पी विश्वकर्मा,राम सुंदर विश्वकर्मा, राजस्व निरीक्षक जगदीश विश्वकर्मा,राम कुमार, योगेन्द्र कुमार, विष्णु कुमार विश्वकर्मा आदि ने डॉ सुनील कुमार विश्वकर्मा से मुलाकात की। डा सुनील कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि विश्वकर्मा देव शिल्पी हैं।जो मूर्ति अयोध्या के श्री राम मंदिर में लगी है,उसका रेखाचित्र हमने तैयार किया था।यह चित्र हमने किसी कल्पना से नहीं भावना से तैयार किया था।