
पारदर्शी विकास न्यूज़ वाराणसी। दशलक्षण पर्युषण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म का संदेश दिया गया। इस अवसर पर कहा गया कि किसी वस्तु की इच्छा होना इस बात का संकेत है कि हमारे भीतर उसका अभाव महसूस हो रहा है। ऐसे में मनुष्य को अपने पास उपलब्ध संसाधनों के लिए परमात्मा का आभार व्यक्त करते हुए संतोषी जीवन अपनाना चाहिए।उत्तम शौच धर्म मनुष्य को बाहरी भौतिक सुखों के बजाय आत्मिक शुद्धता और संतोष का मार्ग दिखाता है। भौतिक संसाधनों और धन-दौलत में स्थायी खुशी तलाशना आत्मा का भ्रम माना गया है। आत्मा के परिणामों और अभिप्राय में शुचिता होना शौच कहलाता है, जबकि सम्यग्दर्शन के साथ यही भावना उत्तम शौच धर्म बन जाती है।इस अवसर पर संदेश दिया गया कि संतोष और शुद्ध मन से ही आत्मिक आनंद की प्राप्ति संभव है। कहा गया—“उत्तम शौच सर्व-जग जाना, लोभ पाप को बाप बखाना।”