
PARDARSHI VIKASH NEWS मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में पदस्थ सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को तीसरी संतान के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई आईजी पंजीयन अमित तोमर द्वारा गुरुवार को जारी आदेश के तहत की गई, जो शुक्रवार को सामने आया। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दिए गए उस बयान के बावजूद यह कार्रवाई कैसे की गई, जिसमें उन्होंने दो से अधिक संतान के आधार पर नौकरी से हटाने के प्रावधान को फिलहाल लागू न करने की बात कही थी।जानकारी के अनुसार, शिकायत में कहा गया था कि परिहार की तीसरी संतान का जन्म शासकीय सेवा के दौरान हुआ। इसके बाद विभाग ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा और विस्तृत जांच शुरू की। जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था, जो सेवा नियमों के दायरे में आता है। इसी आधार पर उन्हें दोषी मानते हुए बर्खास्त करने की सिफारिश की गई, जिसे बाद में स्वीकार कर लिया गया।विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, 10 मार्च 2000 की अधिसूचना में स्पष्ट है कि यदि किसी कर्मचारी की दो से अधिक जीवित संतान हैं और उनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ है, तो वह शासकीय सेवा के लिए अपात्र माना जाएगा। इसी नियम को आधार बनाकर कार्रवाई की गई है। हालांकि, संबंधित अधिकारी ने यह दलील दी थी कि उन्हें इस नियम की पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन विभाग ने इसे स्वीकार नहीं किया।यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मुख्यमंत्री ने 9 जून को यह निर्देश दिया था कि दो से अधिक संतान के आधार पर नौकरी से अयोग्यता वाले प्रस्ताव को हटाया जाए। बावजूद इसके, विभाग का कहना है कि जब तक संशोधित आदेश जारी नहीं होता, मौजूदा नियम ही प्रभावी रहेंगे। इसी वजह से कार्रवाई की गई।अब इस मामले में कानूनी विकल्प खुले हैं। बर्खास्त अधिकारी विभागीय अपील या हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। साथ ही यदि सरकार भविष्य में नया आदेश जारी करती है, तो ऐसे मामलों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।