
pardarshi vikas news amethi
अमेठी जिले के स्थानीय शिव प्रताप इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल पद के कार्यभार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कॉलेज के प्रिंसिपल नवल किशोर सिंह 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गए, जिसके बाद नए कार्यवाहक प्रिंसिपल की नियुक्ति को लेकर प्रबंध तंत्र और शिक्षकों के बीच विवाद खड़ा हो गया है। मामला अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास लंबित है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रबंधक और मैनेजमेंट ने वरिष्ठता के नियमों की अनदेखी करते हुए उप प्राचार्य और सीनियर शिक्षक संजय कुमार को कार्यभार नहीं दिया और जूनियर शिक्षक दिग्विजय सिंह को प्रिंसिपल का चार्ज सौंप दिया। इसके बाद संबंधित पत्रावली जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी के पास अनुमोदन के लिए भेजी गई, लेकिन दोनों कार्यालयों ने इसे वापस कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, संजय कुमार ने 6 जनवरी 2010 को कार्यभार ग्रहण किया था, जबकि दिग्विजय सिंह ने नवंबर 2010 में ज्वाइन किया था। ऐसे में वरिष्ठता के आधार पर संजय कुमार को ही कार्यभार मिलना चाहिए था, लेकिन प्रबंधन ने इस नियम को दरकिनार कर दिया। नवल किशोर सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद नियमानुसार संजय कुमार को कार्यभार मिलना था। इस पूरे मामले पर सामाजिक चिंतक और बहुजन मूवमेंट से जुड़े कार्यकर्ता डॉ. सुनील दत्त ने आरोप लगाया कि प्रबंध तंत्र ने जातीय भावना से प्रेरित होकर जानबूझकर संजय कुमार को कार्यभार नहीं दिया और जूनियर शिक्षक को जिम्मेदारी सौंप दी। इस निर्णय से आहत संजय कुमार ने उच्चाधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह मामला केवल पद का नहीं, बल्कि न्याय और नियमों का है, और वे इसके लिए अंत तक लड़ेंगे। विद्यालय की स्थिति भी इस विवाद को जटिल बना रही है। बताया जा रहा है कि कॉलेज इंटरमीडिएट तक संचालित है, जबकि उसे वित्तीय मान्यता केवल जूनियर हाईस्कूल तक ही प्राप्त है। ऐसे में नियमों का पालन और भी आवश्यक हो जाता है। यही कारण है कि जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी इस मामले में सतर्कता बरत रहे हैं और अभी तक किसी प्रकार की स्वीकृति नहीं दी है।
पारदर्शी विकास से बातचीत में उप प्राचार्य संजय कुमार ने प्रकरण की पूरी जानकारी दी और कहा कि हम अपने कदम अब पीछे नहीं हटा सकते हैं। उधर, मैनेजमेंट द्वारा भेदभावपूर्ण तरीके से की गई कार्यवाही आम्बेडकरवादी सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच सुर्खियों में है। कार्यकर्ताओं में इस निर्णय को लेकर नाराजगी देखी जा रही है और इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया जा रहा है। आगामी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के मौके पर यह प्रकरण और गर्म होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी हो सकते हैं। कुल मिलाकर, यह विवाद अब केवल प्रशासनिक न रहकर सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या निर्णय लेता है और क्या वरिष्ठता व नियमों के आधार पर न्याय सुनिश्चित किया जाता है या नहीं।