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सम्राट अशोक विजय दशमी के रूप में बौद्ध धम्म के अनुयायियों ने मनाया दशहरा पर्व

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अमेठी के यात्री दल ने विश्व शांति स्तूप राजगीर का भ्रमण किया, ऐतिहासिक जानकारियां हासिल कीं

 

 

 

 

अमेठी। बौद्ध धम्म के अनुयायियों ने विजय दशमी का पर्व सम्राट अशोक विजय दशमी के रूप में मनाया। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों ने एक दूसरे को मंगलकामनाएं दीं और ऐतिहासिक जानकारियां शेयर करते हुए पर्व मनाया।बुद्ध विहारों और अम्बेडकर पार्कों में दीप भी प्रज्ज्वलित किए गए। बौद्ध धम्म के तीर्थ स्थलों के भ्रमण पर गये यात्री दल ने विश्व शांति स्तूप राजगीर का भ्रमण किया।अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धर्म तीर्थ यात्रा के तहत अमेठी से निकला तीर्थ यात्रियों का दल यात्रा के तीसरे दिन बिहार के राजगीर पहुंचा। यहां दल ने विश्व शांति स्तूप के दर्शन किए और गृद्धकूट पर्वत के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की जानकारी प्राप्त की।यात्रा का नेतृत्व कर रहे भंते धम्म ज्योति ने बताया कि गृद्धकूट पर्वत भगवान बुद्ध के उपदेशों और जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। बौद्ध परंपरा के अनुसार, देवदत्त ने भगवान बुद्ध को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से पर्वत की चोटी से एक भारी चट्टान गिराई थी। चट्टान का एक टुकड़ा बुद्ध के पैर में लगा, जिससे उन्हें चोट आई। इसके बावजूद उन्होंने देवदत्त के प्रति क्रोध या द्वेष नहीं रखा। यह प्रसंग भगवान बुद्ध की करुणा और क्षमाशीलता को दर्शाता है।भंते धम्म ज्योति ने बताया कि मगध के राजा बिम्बिसार भगवान बुद्ध के प्रमुख अनुयायी थे। वे राजगृह से गृद्धकूट पर्वत पर उनके दर्शन करने और उपदेश सुनने आते थे। पर्वत पर मौजूद प्राचीन पत्थर की सीढ़ियां इस ऐतिहासिक स्थल की महत्ता को दर्शाती हैं।भ्रमण के दौरान यात्रियों ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं, अहिंसा, करुणा और विश्व शांति के संदेश को समझा।