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साहब, ये मेरी मां का कटा हाथ है…”

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गलत इलाज का आरोप, इंसाफ के लिए भटका आईटीबीपी कांस्टेबल

पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। पुलिस कमिश्नर कार्यालय उस समय स्तब्ध रह गया, जब आईटीबीपी का एक जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्माकोल के बॉक्स में लेकर अधिकारियों के सामने पहुंच गया। जवान ने आरोप लगाया कि टाटमिल चौराहा स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में गलत इलाज और इंजेक्शन लगाने की वजह से उसकी मां के हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया, जिसके बाद डॉक्टरों को हाथ काटना पड़ा। जवान तीन दिन से पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहा था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर वह कटा हाथ लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया।मूल रूप से फतेहपुर जिले के हथगाम थाना क्षेत्र के आलीमऊ गांव निवासी विकास सिंह वर्तमान में आईटीबीपी में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं और उनकी पोस्टिंग महाराजपुर में है। उन्होंने बताया कि उनकी 56 वर्षीय मां निर्मला देवी को सांस लेने में दिक्कत, कब्ज और कमजोरी की शिकायत थी। प्रारंभिक इलाज के बाद उन्हें आईटीबीपी अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किया गया, जिसके बाद उन्होंने मां को इलाज के लिए कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया।विकास सिंह का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मां को गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिससे हाथ काला पड़ने लगा और उसमें तेजी से सूजन बढ़ गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें बिठूर रोड स्थित पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि हाथ में गंभीर संक्रमण फैल चुका है। संक्रमण इतना बढ़ चुका था कि डॉक्टरों को उनकी मां का हाथ काटना पड़ा।पुलिस कमिश्नर कार्यालय में जवान ने अधिकारियों के सामने थर्माकोल बॉक्स से मां का कटा हुआ हाथ निकालकर दिखाया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद पुलिस अधिकारी और फरियादी दंग रह गए। अधिकारियों ने तुरंत हाथ को वापस बॉक्स में रखवाया और जवान को शांत कराया।विकास सिंह भावुक होकर बोले, “मेरी मां ने इन्हीं हाथों से मुझे बचपन से पाला-पोसा। आज मेरे सामने उनकी हालत ऐसी हो गई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही। मैं सेना का जवान हूं, फिर भी अपनी मां को इंसाफ नहीं दिला पा रहा हूं।”मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने सीएमओ को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पूरे मामले में मेडिकल पैनल गठित कर जांच कराने और रिपोर्ट आने के बाद एफआईआर दर्ज करने का भरोसा दिया है। इसके बाद जवान शांत हुआ।इस दौरान आईटीबीपी के लिसनिंग ऑफिसर अर्पित सिंह भी जवान के साथ पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही की शिकायत पहले भी सामने आ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि आईटीबीपी की एक महिला कांस्टेबल और एक इंस्पेक्टर की भी कथित इलाज में लापरवाही के चलते मौत हो चुकी है। उन्होंने अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन अब जांच की तैयारी में जुट गया है। वहीं घटना के बाद शहर में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और इलाज की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

प्रकरण के संबंध में संबंधित व्यक्ति की ओर से डीसीपी पूर्वी से मुलाकात की गई थी। इस मामले में डीसीपी से सीएमओ कानपुर नगर को पत्राचार कर कृष्णा अस्पताल और पारस अस्पताल दोनों की भूमिका की जांच कराए जाने के लिए निर्देशित किया गया है। जांच में जो भी तथ्य प्रकाश में आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कटे हुए हाथ के संबंध में फोरेंसिक जांच कराने हेतु भी निर्देश दिए गए हैं। अमरनाथ यादव, एसीपी-स्टाफ अफसर, कानपुर