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राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सभी छंद अनिवार्य करने पर शशि थरूर ने उठाए सवाल

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PARDARSHI VIKASH NEWS कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों को अनिवार्य रूप से बजाने या गाने के प्रस्ताव पर सवाल उठाया है। तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन इसका पूरा संस्करण हर कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर बजाना लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है। थरूर ने कहा कि अधिकांश लोगों को वंदे मातरम का पहला या दूसरा छंद ही याद है और परंपरागत रूप से सार्वजनिक कार्यक्रमों में इन्हीं अंशों का गायन होता रहा है।उन्होंने फरवरी में दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां शुरुआत और अंत दोनों समय राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण बजाया गया था, जिससे लोगों को लंबे समय तक खड़े रहना पड़ा। थरूर का कहना है कि इस विषय पर कोई स्पष्ट कानून नहीं है और इसका समाधान आपसी सहमति से निकाला जाना चाहिए।उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में नए दिशानिर्देश जारी कर सरकारी कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों के गायन की व्यवस्था पर जोर दिया है। राष्ट्रगीत की कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है। ‘वंदे मातरम’ की रचना 1875 में Bankim Chandra Chattopadhyay ने की थी, जबकि 1896 में Rabindranath Tagore ने इसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया था।