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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन -स्वयं सहायता समूह से बदली सुनीता देवी के जीवन की तस्वीर

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अमेठी/संग्रामपुर।  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से गठित स्वयं सहायता समूह ने  गरीब परिवार की महिला सुनीता देवी की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार किया है। सुनीता न केवल स्वयं आत्मनिर्भर हुई है, बल्कि दूसरी महिलाओं के आर्थिक जीवन में भी बदलाव में सहायक बनी हैं।

 

 सुनीता देवी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने और स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणादायक मिसाल है। कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए मजदूरी पर निर्भर रहने वाली सुनीता देवी आज पशुपालन, सिलाई और कृषि जैसे विभिन्न आजीविका साधनों से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। सुनीता देवी बताती हैं कि वह कक्षा 10 तक शिक्षित हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें मजदूरी करनी पड़ती थी। परिवार की मासिक आय सीमित होने के कारण रोजमर्रा के खर्च पूरे करना भी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में स्वयं सहायता समूह उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया। वर्ष 2008 में सुनीता देवी ‘सहारा महिला स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण और सामूहिक रूप से आजीविका गतिविधियां संचालित करने की जानकारी मिली। समूह की बैठकों में नियमित सहभागिता से उनके अंदर आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वयं कुछ नया करने का निर्णय लिया। सुनीता देवी ने समूह के माध्यम से सबसे पहले 10,000 रुपये का ऋण लिया और अपने घर पर ही सिलाई का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे उनके काम की पहचान गांव में बढ़ने लगी। इसके बाद उन्होंने अपनी आजीविका को और मजबूत करने के लिए पशुपालन एवं कृषि जैसी गतिविधियों को भी अपनाया। विभिन्न गतिविधियों से होने वाली आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की अपेक्षा बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुनीता देवी बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में केवल आर्थिक बदलाव ही नहीं आया, बल्कि उनके अंदर निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वह अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करती हैं और स्वयं अपनी आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर परिवार की अन्य महिलाओं में भी आगे बढ़ने की इच्छा पैदा हुई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें बचत, ऋण और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। जनपद अमेठी में मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू के मार्गदर्शन तथा डीसी एनआरएलएम प्रवीणा शुक्ला के निर्देशन एवं प्रभावी क्रियान्वयन से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आजीविका के विभिन्न अवसरों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में समूह स्तर पर महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि के साथ महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक भागीदारी भी मजबूत हो रही है। सुनीता देवी की कहानी बताती है कि यदि महिलाओं को संगठित मंच, उचित मार्गदर्शन और आर्थिक गतिविधियों के लिए अवसर मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा सकती हैं, बल्कि गांव में अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं। आज सुनीता देवी अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहती हैं कि “स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मेरे जीवन में बहुत बदलाव आया है। पहले मैं केवल मजदूरी पर निर्भर थी, लेकिन आज मैं सिलाई, पशुपालन और कृषि से जुड़कर अपने परिवार की आय बढ़ाने में सहयोग कर रही हूं। समूह ने मुझे आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास दिया है।” सुनीता देवी की यह यात्रा निर्भरता से आत्मनिर्भरता, सीमित आय से विविध आजीविका और संकोच से आत्मविश्वास तक के बदलाव की कहानी है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए केवल बचत का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मजबूत आधारशिला भी बन सकते हैं।