
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। बिधनू क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में करीब पांच वर्ष से जेल में बंद युवक को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि पुलिस ने वास्तविक आरोपी के बजाय दूसरे युवक को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। वर्ष 2021 में अधिवक्ता की तहरीर पर नाबालिग बेटी से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने अमीन लायल नामक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। ट्रायल के दौरान गवाहों और पीड़िता के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए, जिससे आरोपी की पहचान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।बचाव पक्ष की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अमीन लायल को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया। साथ ही विवेचना में गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्कालीन विवेचक इंस्पेक्टर विनोद कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को दिए हैं।अदालत की इस टिप्पणी के बाद पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।