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राज्यसभा प्रत्याशियों से भाजपा ने साधे सामाजिक समीकरण

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पारदर्शी विकास न्यूज़  अमेठी। राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की ओर से घोषित प्रत्याशियों की सूची को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी ने नए चेहरों और संगठन से जुड़े नेताओं को मौका देते हुए विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। सूची में ब्राह्मण, राजपूत, ओबीसी, दलित और महिला प्रतिनिधित्व को जगह दी गई है। पार्टी ने पूर्व डीजीपी बृजलाल को दोबारा मौका देने के बजाय अन्य सामाजिक समूहों से जुड़े चेहरों पर दांव लगाया है। गीता शाक्य की जगह श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा धर्मपाल सिंह, विद्या सागर सोनकर, राम प्रताप सिंह, प्रियंका रावत, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय और प्रकाश पाल सहित अन्य नेताओं को भी सूची में शामिल किया गया है।पूर्व मंत्री स्मृति ईरानी का नाम राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची में नहीं होने से अमेठी में उनके समर्थकों में निराशा देखी जा रही है। वहीं बृजलाल को दोबारा मौका नहीं मिलने से कोरी समाज के लोगों में भी निराशा की चर्चा हैसूची को लेकर भाजपा ने जहां सामाजिक और जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है, वहीं सपा की रणनीति को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। सपा ने अभी तीसरे उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। राज्यसभा चुनाव के लिए 16 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है।