
पारदर्शी विकास ब्यूरो / कुशीनगर
कुशीनगर। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन के प्रमुख केंद्र कुशीनगर को दुनिया से हवाई मार्ग के जरिए जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना नियमित यात्री उड़ानों के अभाव में प्रभावित हो रही है। एक ओर कुशीनगर आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नियमित व्यावसायिक उड़ानें नवंबर 2023 के बाद से बंद हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने की उम्मीदों पर सवाल उठने लगे हैं।करीब 448 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 590 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस एयरपोर्ट का उद्घाटन 20 अक्टूबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। उद्घाटन के अवसर पर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से श्रीलंकन एयरलाइंस का विशेष विमान पहुंचा था। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि कुशीनगर सीधे श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम जैसे बौद्ध बहुल देशों से जुड़ेगा और विदेशी श्रद्धालुओं के लिए यहां पहुंचना आसान होगा।एयरपोर्ट पर 3,200 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे है। लगभग 3,600 वर्ग मीटर में बने टर्मिनल भवन की व्यस्त समय में करीब 300 यात्रियों को संभालने की क्षमता बताई गई है। महापरिनिर्वाण मंदिर और रामाभार स्तूप जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों के निकट होने के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सर्किट के महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की योजना थी।हालांकि, नियमित हवाई सेवाएं अधिक समय तक जारी नहीं रह सकीं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की उड़ानें नवंबर 2023 में बंद हो गईं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में एयरपोर्ट से 23,221 यात्रियों ने हवाई यात्रा की थी। 2023-24 में यह संख्या घटकर 17,742 रह गई, जबकि 2024-25 में करीब 270 यात्री दर्ज किए गए।पर्यटन विभाग के आंकड़े इस स्थिति का दूसरा पहलू सामने रखते हैं। वर्ष 2022 में कुशीनगर में 8.89 लाख पर्यटक पहुंचे थे। वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 21.40 लाख और 2024 में 22.47 लाख हो गई। वर्ष 2025 में जनवरी से अक्टूबर तक करीब 19.90 लाख पर्यटकों के पहुंचने का आंकड़ा सामने आया।पर्यटकों की बढ़ती संख्या और एयरपोर्ट पर यात्रियों की घटती संख्या के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। हालांकि, पर्यटकों की कुल संख्या में सड़क और रेल मार्ग से आने वाले लोग भी शामिल हैं, इसलिए इन आंकड़ों की सीधे तुलना नहीं की जा सकती। फिर भी नियमित हवाई संपर्क की कमी पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की चुनौती बनी हुई है।नियमित यात्री उड़ानें बंद होने के बावजूद एयरपोर्ट पर गैर-निर्धारित यानी नॉन-शेड्यूल उड़ानों की आवाजाही जारी रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ऐसी उड़ानें करीब 100 बार संचालित हुईं। इनके जरिए विशिष्ट अतिथि और राजनेता कुशीनगर पहुंचे।ऐसे में सवाल उठता है कि जब एयरपोर्ट पर विशेष विमानों का संचालन संभव है, तो आम यात्रियों के लिए नियमित सेवाएं बहाल करने की दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए विमानन कंपनियों की रुचि, रूट की व्यावसायिक व्यवहार्यता, परिचालन व्यवस्था और यात्रियों की संभावित मांग का आकलन महत्वपूर्ण होगा। अक्टूबर से मार्च तक का समय कुशीनगर के पर्यटन और होटल कारोबार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कारोबारियों को उम्मीद है कि नियमित उड़ानें शुरू होने से विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी। इसका लाभ होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी संचालकों, टूर ऑपरेटरों, गाइडों और स्थानीय दुकानदारों को मिल सकता है।इसके साथ ही कुशीनगर और आसपास के जिलों के व्यापारियों, विद्यार्थियों तथा नौकरीपेशा लोगों को भी प्रमुख शहरों तक हवाई संपर्क मिलने से सुविधा होगी। नियमित घरेलू उड़ानों की बहाली के साथ बौद्ध बहुल देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी की संभावनाओं पर भी काम करने की जरूरत है।कुशीनगर के जिलाधिकारी संजय चौहान ने कहा कि कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल है और यहां पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों के लिए भी अनेक अवसर हैं। एयरपोर्ट के संचालन को लेकर उन्होंने कहा कि कमियों को दूर करते हुए इसे जल्द से जल्द संचालित कराने की दिशा में प्रशासन प्रयास करेगा।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नियमित यात्री उड़ानों की बहाली के लिए ठोस पहल कब शुरू होगी। क्या आगामी पर्यटन सीजन में कुशीनगर एयरपोर्ट फिर से सक्रिय होकर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन को नई उड़ान दे पाएगा? यह सवाल स्थानीय कारोबारियों, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों और आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।