
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर हर्षनगर स्थित इंजीनियर्स सर्विस स्टेशन पेट्रोल पंप के खिलाफ मिली शिकायत की जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित टीम ने पेट्रोल पंप की मशीनों और माप प्रणाली की गहन जांच की, जिसमें सभी व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप मिलीं। गुरुवार को पेट्रोल पंप संचालकों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर जांच रिपोर्ट और संबंधित तथ्यों की जानकारी साझा की। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि जांच के दौरान उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। मंत्रालय के अनुसार दोपहिया और चारपहिया वाहनों के फ्यूल टैंक में सुरक्षा कारणों से 15 से 20 प्रतिशत खाली स्थान रखा जाता है। यह जगह ईंधन के वाष्पीकरण और दबाव नियंत्रण के लिए आवश्यक होती है। इसी कारण कई बार वाहन की बुकलेट में अंकित क्षमता से अधिक ईंधन भरता हुआ दिखाई देता है, जिससे उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बन जाती है।जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वाहन डीलरों और पेट्रोल पंप संचालकों की संयुक्त बैठक आयोजित कर लोगों को इस विषय में जागरूक किया जाए। प्रशासन का मानना है कि सही जानकारी मिलने से भविष्य में इस तरह के विवादों और शिकायतों में कमी आएगी।प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि पेट्रोल पंपों पर लगी मशीनों का सत्यापन निर्धारित मानकों के तहत किया जाता है। प्रत्येक पेट्रोल पंप पर 5 लीटर का प्रमाणित माप उपलब्ध रहता है, जिसके माध्यम से ग्राहक किसी भी समय मशीन की जांच कर अपनी शंका का समाधान कर सकते हैं। यदि किसी उपभोक्ता को ईंधन की मात्रा को लेकर संदेह हो तो वह मौके पर ही परीक्षण कराने का अधिकार रखता है।बैठक में पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उपभोक्ताओं से ओवर फ्यूलिंग से बचने की अपील की। उनका कहना था कि वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक ईंधन भरवाने से सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। एसोसिएशन ने उपभोक्ताओं से जागरूक रहने और किसी भी संदेह की स्थिति में उपलब्ध सत्यापन प्रक्रिया का उपयोग करने की सलाह दी।प्रशासन का कहना है कि उपभोक्ताओं और पेट्रोल पंप संचालकों के बीच पारदर्शिता बनाए रखने तथा भ्रांतियों को दूर करने के लिए आगे भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
जांच में पेट्रोल पंप की मशीनें और माप प्रणाली पूरी तरह सही पाई गई हैं। कई बार वाहन की बुकलेट में दर्ज टैंक क्षमता और वास्तविक फ्यूल भरने की मात्रा को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो जाता है। इसी वजह से लोगों को सही जानकारी देने के लिए जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। -एसोसिएशन अध्यक्ष संजय गुप्ता