
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ/अमेठी। 24 सितंबर 1932 को महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के बीच हुए पूना पैक्ट को लेकर गुरुवार को बहुजन समाज के विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस ऐतिहासिक समझौते के दलित राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़े प्रभाव और पृथक निर्वाचक मंडल के मुद्दे पर चर्चा की।बामसेफ के संस्थापक सदस्य आरसी बौद्ध ने पूना पैक्ट को परिस्थितियों के दबाव में हुआ समझौता बताया। बसपा की पूर्व जिला सचिव अमिता अंबेडकर ने दलित नेताओं से अपने राजनीतिक विचारों और आंदोलन के प्रति प्रतिबद्ध रहने की अपील की। बसपा के वरिष्ठ नेता अखिलेश अंबेडकर ने कांग्रेस और गांधी की नीतियों को लेकर आलोचनात्मक विचार रखे।पूर्व सांसद घनश्याम चंद खरवार ने कार्यकर्ताओं से डॉ. अंबेडकर की पुस्तक व्हाट कांग्रेस एंड गांधी हैव डन टू द अनटचेबल्स पढ़ने की बात कही। बामसेफ कार्यकर्ता हौंसिला प्रसाद ने भी राजनीतिक दलों की नीतियों पर अपनी राय रखी।बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने राजनीतिक शक्ति को सामाजिक परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा कि बसपा उनके विचारों और सामाजिक न्याय के मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है।
बहुजन समाज पार्टी का गठन मान्यवर कांशीराम साहब ने 14अप्रैल 1984को किया। बाबा साहब डॉ अम्बेडकर ने आजीवन संघर्षरत रहे, फिर भी देश की तत्कालीन परिस्थितियों ने उनके सपनों को साकार नहीं होने दिया। बाबा साहब डॉ अम्बेडकर ने भारत को दुनिया का सबसे अच्छा संविधान दिया है।इस संविधान को ठीक ढंग से लागू कराने के लिए उन्होंने पोलिटिकल पावर की मास्टर चाबी हासिल करने का संदेश दिया था, बहुजन समाज पार्टी माननीया बहन मायावती जी के कुशल नेतृत्व में इस संदेश को धरातल पर उतारने के लिए संघर्षरत है।
विश्व नाथ पाल ,प्रदेश अध्यक्ष ,बहुजन समाज पार्टी, उत्तर प्रदेश