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नगर निगम में कुर्सी की जंग तेज, पार्षद अब लखनऊ तक पैदल मार्च की तैयारी में!

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पारदर्शी विकास न्यूज़, कानपुर। नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के बीच शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को बैठक के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद गुरुवार को नगर निगम मुख्यालय में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी रही। पार्षद दल की बैठक को देखते हुए परिसर में कई थानों की पुलिस और पीएसी तैनात रही। भारी पुलिस बल की मौजूदगी पर पार्षदों ने सवाल उठाए तो एसीपी स्वरूप नगर ज्योति श्री ने सुरक्षा के लिहाज से तैनाती की बात कही।बीजेपी पार्षद दल के नेता नवीन पंडित के नेतृत्व में हुई बैठक में 38 पार्षद शामिल हुए। बैठक में नगर आयुक्त के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। पार्षदों ने तय किया कि जल्द सदन बुलाकर पांच वकीलों का पैनल बनाया जाएगा और कार्यकारिणी की बैठक सार्वजनिक रूप से कराने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।नवीन पंडित ने आरोप लगाया कि पिछले एक साल से शहर में विकास कार्य प्रभावित हैं और सड़कों पर समय से पैचवर्क तक नहीं कराया गया। उनका कहना है कि इससे पार्षदों और बीजेपी की छवि पर असर पड़ रहा है। पार्षदों ने अपनी मांगों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाने के लिए लखनऊ तक पैदल मार्च निकालने की तैयारी भी जताई। महापौर प्रमिला पांडेय ने भी कहा कि मामला मुख्यमंत्री और लखनऊ में बीजेपी संगठन के नेताओं के सामने उठाया जाएगा।बुधवार को कार्यकारिणी की बैठक में महापौर ने अधिवक्ता मोहम्मद जावेद और रिषभ अवस्थी को बुलाया था। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई और उनके सामने जवाब देने से इनकार किया। अधिवक्ताओं के बाहर नहीं जाने पर नगर आयुक्त बैठक छोड़कर चले गए। उनके साथ अन्य अधिकारी भी बाहर निकल गए, जिसके बाद पार्षदों ने नारेबाजी की।अब विवाद नगर निगम की बैठक से निकलकर लखनऊ तक पहुंचने की तैयारी में है। शहर के विकास कार्यों पर सवाल, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव और परिसर में पुलिस की तैनाती—इन सबके बीच जनता को इंतजार है कि समाधान निकलेगा या सियासी खींचतान और लंबी चलेगी।


दो वकीलों की मौजूदगी बनी विवाद की वजह
बुधवार को कार्यकारिणी की बैठक में महापौर ने अधिवक्ता मोहम्मद जावेद और रिषभ अवस्थी को बुलाया था। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई और उनके सामने जवाब देने से इनकार किया। अधिवक्ताओं के बाहर नहीं जाने पर नगर आयुक्त बैठक छोड़कर चले गए। उनके साथ अन्य अधिकारी भी बाहर निकल गए, जिसके बाद पार्षदों ने नारेबाजी की।