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महारास, कंस वध, जरासंध युद्ध और रुक्मिणी मंगल से भक्तिरस में डूबा कथा पंडाल

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जगदीशपुर/अमेठी।  धाम पूरे ठाकुर दुबे, पलिया पश्चिम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के षष्ठम दिवस कथा पंडाल श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से सराबोर रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे और देर रात तक कथा श्रवण, भजन-कीर्तन व आरती में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। शंखध्वनि और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा।पूज्य कथा वाचक चंद्रकांतानंद जी महाराज ने महारास लीला, कंस वध, जरासंध युद्ध, रुक्मिणी मंगल एवं विवाह प्रसंगों का भावपूर्ण और विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को प्रेम, भक्ति, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।महारास लीला के प्रसंग में महाराज जी ने बताया कि यह भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के निष्कलंक प्रेम, पूर्ण समर्पण और अनन्य भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति में अहंकार नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास होता है। इस प्रसंग को सुन श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए।कंस वध प्रसंग में अधर्म, अत्याचार और अहंकार पर धर्म व सत्य की विजय का संदेश दिया गया। महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर अन्याय और भय का अंत किया। यह प्रसंग श्रद्धालुओं में साहस और धर्म रक्षा की प्रेरणा देता है।जरासंध युद्ध के वर्णन में साहस, धैर्य, नीति और संघर्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में विवेक और आत्मविश्वास ही सफलता का मार्ग बनते हैं।रुक्मिणी मंगल और विवाह प्रसंगों में प्रेम, त्याग, मर्यादा और पारिवारिक संस्कारों का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मुकेश शुक्ल, राजकुमार मिश्र, डॉ. पवन तिवारी, संजय शुक्ला, सुधाकर त्रिपाठी, विनय त्रिपाठी, अखण्ड सिंह, संदीप पाण्डेय, ज्ञानेश त्रिपाठी और मनीष सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा। देर रात तक आरती और भजन-कीर्तन के बीच पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में सराबोर रहा।