
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। नगर निगम सदन में महिला पार्षद लक्ष्मी कोरी से कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब यह विवाद भाजपा पार्षदों के बीच भी सामने आ गया है। शुक्रवार को भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित के नेतृत्व में 15 पार्षद पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से मिलने पहुंचे। उन्होंने लक्ष्मी कोरी की ओर से पांच भाजपा पार्षदों के खिलाफ दी गई शिकायत को निरस्त करने की मांग की। हालांकि, सार्वजनिक अवकाश के चलते पुलिस कमिश्नर से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद पार्षद उनके बंगले पहुंचे, लेकिन वहां भी मुलाकात नहीं हो पाई।भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित ने कहा कि नगर निगम सदन में शहर की गंभीर समस्याओं पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान वार्ड-10 की पार्षद लक्ष्मी कोरी महापौर प्रमिला पांडेय के सामने ऊंची आवाज में बोलने लगीं। तभी पार्षद आलोक पांडेय भी वहां पहुंचे और आत्महत्या की बात कहते हुए हंगामा करने लगे। नवीन पंडित के मुताबिक, महापौर ने दोनों को शांत कराने का प्रयास किया। इसके बावजूद लक्ष्मी कोरी बोलती रहीं। जब अन्य पार्षदों ने सदन का समय बर्बाद नहीं करने की बात कही तो आलोक पांडेय सदन से बाहर चले गए और लक्ष्मी कोरी अपनी सीट पर बैठ गईं।नवीन पंडित ने कहा कि सदन में बहस और कहासुनी होती रहती है। यदि लक्ष्मी कोरी को किसी बात पर आपत्ति थी तो उन्हें महापौर या पार्टी संगठन के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी। सदन की बात सदन तक ही रहनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सदन में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे, तब उसी समय शिकायत क्यों नहीं की गई। भाजपा पार्षदों ने लक्ष्मी कोरी की शिकायत को निरस्त करने की मांग की है।वहीं, लक्ष्मी कोरी ने 30 सितंबर को डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव से शिकायत कर पांच भाजपा पार्षदों पर अभद्रता और धक्का-मुक्की का आरोप लगाया था। इनमें आकर्ष बाजपेई, वंदना शर्मा, विद्या वर्मा, गोविंद शुक्ला और गोलू शुक्ला के नाम शामिल हैं। लक्ष्मी कोरी के अनुसार, 26 सितंबर को नगर निगम सदन की कार्यवाही के दौरान उन्हें जानकारी मिली थी कि कौशलपुरी मंडल मंत्री मनीष बाजपेयी और पार्षद पवन गुप्ता को महापौर के बेटे बंटी पांडेय और अनुराग पांडेय ने एक कमरे में बंद कर रखा है। उन्होंने इस मामले का विरोध किया था।लक्ष्मी कोरी का आरोप है कि दोपहर करीब 2:15 से 2:30 बजे के बीच जब उन्होंने महापौर को घटना की जानकारी देने की कोशिश की तो उन्हें बागी पार्षद बताते हुए सदन से बाहर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद उनके साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई। उन्होंने खुद को दलित समुदाय से आने वाली और सुरक्षित सीट से दोबारा निर्वाचित पार्षद बताते हुए सदन में अपमानजनक व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने पांचों पार्षदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।इस मामले में पार्षद पवन गुप्ता की शिकायत पर भी पुलिस जांच कर रही है। बुधवार को स्वरूप नगर थाने की पुलिस नगर निगम के स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम पहुंची थी। वहां 26 सितंबर को हुई घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज देखे गए। फिलहाल, मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक ओर लक्ष्मी कोरी ने अभद्रता और धक्का-मुक्की का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा पार्षदों ने उनकी शिकायत को गलत बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की है। पुलिस जांच के बाद ही घटना से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।