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मुझे कुर्सी चाहिए, मैं साधु-संत थोड़ी हूं: अखिलेश

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पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच कुर्सी और जनसेवा को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। सोमवार को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में अखिलेश ने पलटवार करते हुए कहा कि वे राजनीति में सरकार बनाने और जनता की सेवा करने आए हैं, साधु-संत नहीं हैं कि जंगल या मठ में चले जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश का विकास करने के लिए सत्ता जरूरी है।यह बयान सीएम योगी की उस टिप्पणी के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि साधु-संतों का लक्ष्य सत्ता नहीं, बल्कि लोककल्याण और सेवा है। राजनीतिक तकरार के बीच अखिलेश ने करीब 20 नेताओं को सपा की सदस्यता दिलाई। इनमें पूर्व भाजपा विधायक सिनोद शाक्य, पूर्व विधायक कुशाग्र सागर, बसपा नेता दारा सिंह प्रजापति, पूर्व आईएएस राम बहादुर पासी और अमेरिका से लौटीं सबीना परवीन शामिल हैं।अखिलेश ने दावा किया कि इन नेताओं के आने से पीडीए की लड़ाई मजबूत होगी। उन्होंने 2027 में सपा की सरकार बनने का भरोसा भी जताया। वहीं, सबीना परवीन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और शोध के क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई। दारा सिंह प्रजापति ने कहा कि वह टिकट के लिए नहीं, बल्कि अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने के लिए सपा में आए हैं।कार्यक्रम में पांच गरीब महिलाओं को नए मकानों की चाबियां सौंपी गईं। अब सवाल यही है कि कुर्सी और जनसेवा की इस सियासी बहस में जनता 2027 में किसके दावों पर भरोसा जताएगी?