
पारदर्शी विकाश न्यूज़ लखनऊ। KGMU के नेत्र रोग विभाग में दवाएं और मोतियाबिंद ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले लेंस मरीजों को निजी दुकानों से लिखे जाने के आरोपों की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच के दौरान पता चला कि विभाग के एक डॉक्टर ने पिछले छह महीनों में 244 मोतियाबिंद ऑपरेशन किए, लेकिन इनमें से केवल एक ऑपरेशन ही आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया।जांच में हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (HRF) के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले लेंसों के इस्तेमाल को लेकर भी अनियमितताओं की बात सामने आई है। रिकॉर्ड के अनुसार विभाग में HRF लेंसों का उपयोग लगभग 70 प्रतिशत मामलों में ही हुआ, जबकि सामान्य रूप से यह अनुपालन 95 से 100 प्रतिशत के बीच होना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि HRF के माध्यम से अधिकांश प्रकार के लेंस उपलब्ध रहते हैं।जांच अधिकारियों के अनुसार विभाग में आमतौर पर करीब 50 प्रतिशत मोतियाबिंद ऑपरेशन आयुष्मान भारत और अन्य सरकारी कैशलेस योजनाओं के तहत किए जाते हैं। ऐसे में 244 ऑपरेशन में केवल एक आयुष्मान लाभार्थी का होना जांच का प्रमुख विषय बन गया है।सूत्रों के मुताबिक, विभाग के अन्य चिकित्सकों की तुलना में एक डॉक्टर द्वारा HRF लेंसों का अपेक्षाकृत कम उपयोग किए जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। समिति विभिन्न रिकॉर्ड और दस्तावेजों का मिलान कर तथ्यों की पुष्टि में जुटी है।