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कविता के विविध रंगों से सजी काव्य संध्या, देर रात तक गूंजती रहीं तालियां

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PARDARSHI VIKASH NEWS कानपुर कैंट क्षेत्र के मीरपुर स्थित पानी की टंकी के समीप आयोजित काव्य-संध्या में कविता, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों के रंगों ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कार्यक्रम में शहर के कई चर्चित कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को स्वर दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अशोक शास्त्री ने की, जबकि संचालन कवि डॉ. दीप कुमार शुक्ल ने किया। काव्य-संध्या का शुभारंभ मां वीणावादिनी की वंदना के साथ हुआ। इसके बाद हास्य-व्यंग्य के चर्चित कवि डॉ. राज कुमार सचान ने अपनी व्यंग्यात्मक प्रस्तुतियों से माहौल को खुशनुमा बना दिया। उनकी रचनाओं पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए।वरिष्ठ कवि अशोक शास्त्री ने अपनी प्रभावशाली रचना “बगुलों जैसा हंस देखकर, सर्प सरीखा दंश देखकर” सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। वहीं डॉ. दीप कुमार शुक्ल ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को समर्पित कविता “ऊंच-नीच का भेद खत्म हो, सब हों एक बराबर...” प्रस्तुत कर श्रोताओं की वाहवाही हासिल की।कार्यक्रम संयोजक कवि जंगी लाल प्रजापति ‘नान स्टॉप’ ने संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर के संघर्षपूर्ण जीवन और उनके विचारों को अपनी कविता के माध्यम से जीवंत किया। कवि उदय नारायण “उदय” ने भी सामाजिक चेतना से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी।काव्य-संध्या में समाजसेवी सतीश बाल्मीकि, सीटू बक्सरिया अंबेडकर, धर्मेंद्र सेठ, दुर्गेश पांडेय, श्याम लाल, प्रेमचंद्र, मदन और पप्पू समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी कवियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।