
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक बुजुर्ग ने मंदिर में अपनी जान दे दी? कुत्ते के काटने के बाद से बदलते व्यवहार और बार-बार बलि देने की बात कहने वाले 57 वर्षीय रामआसरे की कहानी मंगलवार सुबह दर्दनाक अंत पर पहुंच गई। बिधनू के धीरपुर गांव में वह झोपड़ी से निकले और करीब 300 मीटर दूर काली माता के स्थान पर पहुंचकर बांके से अपना गला काट लिया। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया।रामआसरे मूल रूप से तरगांव (पतारा) के निवासी थे। वह करीब 20 साल से धीरपुर गांव में अपने बहनोई मुन्नीलाल के खेत के पास झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। उनकी शादी नहीं हुई थी और बहन सुखरानी के घर से उनके खाने-पीने की व्यवस्था होती थी।भांजे शैलेश के मुताबिक, 14 सितंबर को एक कुत्ते ने रामआसरे को काट लिया था। उन्हें सीएचसी ले जाकर रेबीज का इंजेक्शन लगवाया गया और घाव का उपचार कराया गया। इसके बाद से उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहने की बात परिजनों ने बताई। वह अक्सर काली माता के स्थान पर अपनी बलि देने की बात कहते थे।26 सितंबर को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सीएचसी से हैलट रेफर किया गया, लेकिन परिजन उन्हें घर ले आए। 28 सितंबर को दोबारा हैलट ले जाने पर डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताई। इसके बाद उन्हें वापस घर लाया गया।मंगलवार सुबह करीब पांच बजे हुई घटना की सूचना पर पुलिस पहुंची और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी तेज बहादुर सिंह ने बताया कि मामले में परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।