
पारदर्शी विकास न्यूज़ अमेठी/लखनऊ। रेलवे में हो रहे संरचनात्मक बदलाव और निजीकरण में कुलियों के काम को सुरक्षित करने और बैटरी रिक्शा संचालन, ट्रॉली से सामान ढोने तथा माई कुली एप जैसी चीजों को कुलियों की सहकारी समितियां को सौंपने की मांग राष्ट्रीय कुली मोर्चा की वर्चुअल बैठक में उठी। बैठक में कुलियों को रेलवे की नौकरी में समायोजित करने और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए रेल मंत्रालय के कराए गए सर्वे की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का अनुरोध रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से किया गया। इस संबंध में पूरे देश में सूचना के अधिकार कानून के तहत सरकार से जवाब मांगने का निर्णय भी बैठक में हुआ। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए राष्ट्रीय कुली मोर्चा के कोऑर्डिनेटर राम सुरेश यादव ने बताया कि रेलवे में हो रहे संरचनात्मक बदलाव के कारण रेलवे की कुलियों के सामने अपने जीवन को चलाने का संकट खड़ा हो गया है।निजी कंपनियों द्वारा बैटरी रिक्शा संचालन, ठेकेदारों से कराई जा रही ट्रॉली प्रथा और प्राइवेट माई कुली एप जैसी कार्रवाइयों के कारण कुलियों की आजीविका पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। चंद कॉर्पोरेट घरानों के मुनाफे के लिए सरकार इन नीतियों को लेकर आ रही है। बैठक में यह आम राय बनी की भारत सरकार से कहा जाए कि वह सारे कार्य जो यात्रियों के सामान ढोने के लिए रेलवे द्वारा प्राइवेट कंपनियों से कराए जा रहे हैं उन्हें कुलियों की सहकारी समितियां को सौंपा जाए ताकि उसका मुनाफा कुलियों को मिले और वह लाभान्वित हो सकें।