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इस्तीफा मीडिया को नहीं, संगठन को दें' : भाजपा जिलाध्यक्ष

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। नगर निगम में मेयर और भाजपा के बागी पार्षदों के बीच चल रहे विवाद के बीच भाजपा कानपुर उत्तर के जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर किसी भी तरह का मतभेद सार्वजनिक करने के बजाय संगठन के सामने रखा जाना चाहिए। मीडिया के सामने इस्तीफे की बात करना उचित तरीका नहीं है।जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने कहा कि चाहे छह पार्षद हों या 75, सभी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं और पार्टी के टिकट पर ही निर्वाचित होकर आए हैं। यदि किसी प्रकार का मनमुटाव या समस्या थी तो उसे संगठन के समक्ष रखा जाना चाहिए था, ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके।उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर उत्पन्न होने वाले विवाद संवाद और आपसी चर्चा से सुलझाए जाते हैं, न कि सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी से। इस्तीफा भी संगठन को दिया जाता है, मीडिया को नहीं। यदि किसी पार्षद को कोई शिकायत या असंतोष है तो वह पार्टी कार्यालय आए, जहां बैठकर सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।अनिल दीक्षित ने कहा कि नगर निगम से जुड़ी समस्याएं महापौर के समक्ष रखी जानी चाहिए, जबकि संगठन से जुड़े मुद्दों पर पार्टी कार्यालय में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप से समाधान नहीं निकलता, बल्कि इससे विवाद और बढ़ता है। किसी भी मतभेद का सबसे बेहतर रास्ता टेबल टॉक और आपसी संवाद ही है।उन्होंने बताया कि यह मामला पहले ही प्रभारी मंत्री और क्षेत्रीय अध्यक्ष के संज्ञान में लाया जा चुका है। सभी पक्षों के साथ बैठक भी हो चुकी है और संगठन इस पूरे प्रकरण पर गंभीरता से काम कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही सभी मतभेद दूर कर लिए जाएंगे और पार्टी के भीतर का विवाद समाप्त हो जाएगा।गौरतलब है कि हाल ही में भाजपा के 75 पार्षदों ने प्रेसवार्ता कर छह बागी पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक इस्तीफा देने पर विचार करेंगे। इसी घटनाक्रम के बाद जिलाध्यक्ष का यह बयान सामने आया है।