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गर्मी का कहर, पारा 44 डिग्री पार

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। मई की भीषण गर्मी लोगों पर कहर बनकर टूट रही है। तेज धूप और लू के थपेड़ों ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। बुधवार दोपहर 12 बजे शहर का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जो सामान्य से 3.8 डिग्री अधिक रहा। एयरफोर्स स्टेशन पर तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।रात का तापमान भी सामान्य से अधिक 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह से ही तेज गर्मी और उमस के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर में चल रही गर्म हवाओं के चलते सड़कों पर आवाजाही कम रही। खासकर स्कूलों की छुट्टी के समय छात्र-छात्राएं लू से परेशान नजर आए।तेज धूप से बचने के लिए लोग मुंह पर गमछा, स्कार्फ और कपड़ा बांधकर निकलते दिखे। कई लोगों ने छाते का सहारा लिया। वहीं भीषण गर्मी के बीच शहर के विभिन्न स्थानों पर राहगीरों के लिए शर्बत और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई। गन्ने का रस, शिकंजी और अन्य ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर भीड़ देखने को मिली।चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के वेदर स्टेशन के अनुसार, 44 डिग्री सेल्सियस इस मई महीने का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि थार मरुस्थल से आने वाली गर्म हवाएं तापमान बढ़ा रही हैं। आने वाले दिनों में तेज धूप और शुष्क मौसम बने रहने की संभावना है। पूरे सप्ताह तापमान में क्रमिक बढ़ोतरी और लू चलने के आसार हैं।भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने पीजी से लेकर कक्षा 8 तक के सभी बोर्ड के स्कूलों में 31 मई तक ग्रीष्मावकाश घोषित कर दिया है। प्रशासन ने लोगों से दोपहर में अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की अपील की है।

9वीं से 12वीं तक के स्कूल 28 मई तक बंद
मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी में कानपुर को लू और अत्यधिक गर्मी के कारण रेड जोन में चिन्हित किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जनपद के सभी शैक्षिक बोर्डों द्वारा संचालित कक्षा 9 से 12 तक के विद्यालयों में तत्काल प्रभाव से 28 मई 2026 तक ग्रीष्मावकाश घोषित कर दिया गया है।आदेश में कहा गया है कि वर्तमान में तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है और भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है।प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।