
पुतला दहन रोकने में पुलिस का बूट-बट इस्तेमाल लोकतंत्र की हत्या: अनस साहू
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। देश में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में गिरावट के आरोपों को लेकर शनिवार को छात्रसंघ बहाली मोर्चा और विधि छात्र मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। आक्रोशित छात्रों का कहना था कि SSC GD, NEET और CBSE 12वीं जैसी परीक्षाओं में धांधली और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार को “युवा विरोधी” बताते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की।प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब छात्र पुतला दहन की कोशिश कर रहे थे। आरोप है कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पुतला छीन लिया, जिससे छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इस दौरान धक्का-मुक्की और नारेबाजी भी देखने को मिली।छात्र नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने से उन्हें रोका जा रहा है। छात्र नेताओं का आरोप है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए दमनकारी तरीके अपना रही है।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक परीक्षाओं में कथित धांधली की निष्पक्ष जांच नहीं होती और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही छात्रसंघ चुनाव बहाली की भी मांग की गई।छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।इस दौरान प्रदर्शन में कई छात्र नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग को प्रमुख रूप से उठाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
"पुतला दहन से रोकने के लिए पुलिस ने जिस तरह बूटों और बटों का इस्तेमाल किया, वह लोकतंत्र की हत्या है। पुलिस के दम पर छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश नाकाम होगी। यह लड़ाई अब और उग्र होगी।"— अनस साहू, छात्र नेता
"सरकार और प्रशासन चाहे जितने दमनकारी हथकंडे अपना ले, छात्रों की न्यायसंगत आवाज को दबाया नहीं जा सकता। परीक्षाओं को व्यापार बनाने वाली इस सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"— अनुज त्रिपाठी, छात्र नेता