
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। बवासीर से राहत पाने के लिए देसी तरीके से सिकाई करना 45 वर्षीय मजदूर को भारी पड़ गया। गर्म पानी में पत्थर डालकर उसकी गर्मी और भाप से सिकाई करने के दौरान संतुलन बिगड़ने से करीब डेढ़ किलो का पत्थर मलद्वार के रास्ते शरीर के अंदर चला गया। दर्द बढ़ने पर मरीज उर्सला अस्पताल पहुंचा, जहां वरिष्ठ सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा और उनकी टीम ने बिना पेट खोले ऑपरेशन कर पत्थर बाहर निकाल दिया।सरसैया घाट निवासी युवक करीब एक साल से बवासीर से परेशान था। करीब 15 दिनों से वह स्थानीय हकीम की सलाह पर गर्म पानी में पत्थर डालकर सिकाई कर रहा था। छह दिन पहले सिकाई के दौरान हादसा हुआ, लेकिन झिझक के कारण उसने किसी को जानकारी नहीं दी। करीब 48 घंटे तक तेज दर्द सहने के बाद सोमवार को अस्पताल पहुंचा।एक्स-रे में मलद्वार के मुहाने पर बड़ा पत्थर फंसा मिला। डॉक्टरों ने बताया कि पत्थर ऊपर खिसकता तो आंतों में पहुंच सकता था और पेट खोलकर जटिल सर्जरी करनी पड़ती। सर्जिकल टीम ने सावधानी से बिना पेट में चीरा लगाए पत्थर निकाल दिया। डॉक्टर ने लोगों से बीमारी में घरेलू नुस्खों और नीम-हकीम से बचकर योग्य चिकित्सक से उपचार कराने की अपील की।