
पारदर्शी विकास न्यूज़ वाराणसी। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “भारतीय ज्ञान परंपरा की पुनर्प्रतिष्ठा” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस में चार सत्रों के माध्यम से वर्तमान शिक्षा की चुनौतियों, भारतीय शैक्षिक लक्ष्यों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया गया। उद्घाटन सत्र में प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि भारत ने ज्ञान को कभी नहीं खोया, बल्कि उसे देखने की दृष्टि कमजोर हुई है। मुख्य वक्ता डी. रामकृष्ण राव ने शिक्षा की मूलभूत चुनौतियों को स्वीकार कर उनके समाधान खोजने पर जोर दिया। निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने स्वस्थ संस्कार, आत्मबोध और आचार्य के गुणों पर प्रकाश डाला।दूसरे सत्र में गोबिंद चंद्र महंत ने शिक्षा संस्थानों को समाज और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शिक्षक, अभिभावक और प्रशासन के समन्वय को आवश्यक बताया। तीसरे सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को कक्षा स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने पर चर्चा हुई।अंतिम सत्र में अवनीश भटनागर और प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी ने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर जोर दिया। प्रथम दिवस का समापन वंदे मातरम् के साथ हुआ। कार्यशाला का समापन 25 अक्टूबर को होगा।