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भोजन का अधिकार -राष्ट्रीय अधिवेशन में खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर हुई परिचर्चा

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टेलीविजन बहसों में लगातार कम हुई है भोजन और पोषण के मुद्दों पर चर्चा

संजीव भारती लखनऊ। भोजन के अधिकार को लेकर भोपाल में चल रहे तीसरे राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन जालौन जिले से प्रतिनिधि मलकपुरा गांव के सरपंच ने मध्यान्ह भोजन योजना में सुधार की मांग उठाई। खाद्य सुरक्षा, पोषण और सामाजिक सुरक्षा के बुनियादी मुद्दों पर जोर दार परिचर्चा हुई। दूसरे दिन अधिवेशन को राज्य सभा सदस्य पवन खेड़ा ने सम्बोधित किया।भोजन और पोषण जैसे बुनियादी मुद्दे मुख्यधारा के विमर्श से दूर होते जा रहे हैं। इसका असर बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर दिखाई दे रहा है। बालाघाट में हाल में हुई बच्चों की मौतों का मामला लंबे समय से चले आ रहे पोषण संकट की ओर संकेत करता है। यह बात भोजन और पोषण के अधिकार पर तीसरे राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन हुई चर्चा में सामने आई। आइकफ आश्रम में चल रहे अधिवेशन में 17 राज्यों के 400 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।बालाघाट में बच्चों की मौतों की रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार बिंदु ने कहा कि यह केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से जारी पोषण संकट का संकेत है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों का जंगल से रिश्ता कमजोर हुआ है। जंगल पर निर्भर समुदाय सरकारी योजनाओं पर अधिक निर्भर हो गए हैं, जिसका असर उनके पोषण पर भी पड़ रहा है।पत्रकार रोईन ने कहा कि भोजन, पोषण और वंचित समुदायों के मुद्दों पर संवेदनशील रिपोर्टिंग जरूरी है। ऐसी रिपोर्टिंग से लोगों में समझ और संवेदना पैदा होती है, लेकिन इन विषयों पर रिपोर्टिंग चुनौतीपूर्ण होने के कारण पर्याप्त खबरें सामने नहीं आ पातीं।जनप्रतिनिधियों के सत्र में राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि बुनियादी मुद्दे मुख्यधारा के विमर्श से गायब हो रहे हैं। पिछले 14-15 वर्षों में टेलीविजन बहसों में भी इन विषयों पर चर्चा कम हुई है। उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा है, लेकिन पोषण की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने एसआईआर में नाम हटाए जाने से अधिकारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। विधायक ओंकार मरकाम ने भी अधिवेशन को संबोधित किया।जमीन की आवाजें’ सत्र में विभिन्न राज्यों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के मलकपुरा गांव के सरपंच ने पंचायतों के पास पर्याप्त अधिकार नहीं होने की बात कही। उन्होंने बताया कि क्राउड फंडिंग के जरिए स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास किया गया। गुजरात की सायरा बानो ने बताया कि उनके क्षेत्र के तीन आंगनवाड़ी केंद्रों में दो किराये के भवनों में संचालित हैं और नियमित संचालन नहीं होने से बच्चों के पोषण पर असर पड़ रहा है।समानांतर सत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आंगनवाड़ी, मध्यान्ह भोजन, मातृ एवं बाल पोषण, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जवाबदेही और समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया। अधिवेशन के अंतिम दिन बच्चों के भोजन और पोषण के अधिकार को लेकर मनीषा मार्केट से बिट्टन मार्केट तक दोपहर तीन बजे पदयात्रा निकाली जाएगी। तीन दिनों की चर्चा के बाद मांगपत्र तैयार कर नीति-निर्धारकों को भेजा जाएगा।


 

बी जी वी एस के राष्ट्रीय केन्द्र से आशा मिश्रा और राज्य केंद्र तेजराम भारती चर्चा सत्रों में शामिल हुए।उत्तर प्रदेश में स्कूलों में तीसरे महीने मिलती है मध्यान्ह भोजन योजना की धनराशि 
अमेठी। बच्चों को भोजन का अधिकार मिलने के बाद उत्तर प्रदेश में पी एम पोषण योजना के अन्तर्गत मध्यान्ह भोजन योजना संचालित है।इस योजना के अन्तर्गत मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण मनमानी तरीके से काम कर रहा है। स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन के लिए कन्वर्जन कास्ट और खाद्यान्न तीसरे महीने मिलती है।तीन महीने तक हेडमास्टरों को उधारी पर सामान खरीदने पड़ते हैं। अमेठी जिले में पिछले चार महीने से कन्वर्जन कास्ट का भुगतान नहीं हुआ है।