
PARDARSHI VIKASH NEWS अयोध्या में तैनात GST के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह द्वारा 27 जनवरी 2026 को सीएम योगी के सम्मान में इस्तीफा देने की घोषणा और बाद में 30 जनवरी को उसे वापस लेने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। उनके दिव्यांगता प्रमाणपत्र को लेकर उठे सवालों के चलते मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। प्रशांत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की, जबकि उनके भाई विश्वजीत सिंह ने ही इस पूरे मामले को कोर्ट में चुनौती दी है।मामले में मऊ के CMO की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में प्रशांत सिंह को अपनी दिव्यांगता साबित करने के लिए पांच बार मेडिकल बोर्ड के सामने बुलाया गया, लेकिन वे एक बार भी उपस्थित नहीं हुए। 30 मई को आजमगढ़ मेडिकल बोर्ड के समक्ष भी उनकी पेशी नहीं हुई। वहीं प्रशांत सिंह का कहना है कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना आवश्यक नहीं है।हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार के कई प्रमुख अधिकारियों समेत कुल 16 विभागों को नोटिस जारी किया है और दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जांच पर भी सवाल उठाए हैं। वहीं प्रशांत सिंह के भाई का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की व्यापक जांच होनी चाहिए। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।