
क्लासरूम से रिसर्च तक AI का जलवा
जगनायक प्रधान
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर और डीबीएस कॉलेज, गोविंद नगर के संयुक्त तत्वावधान में 14 अक्टूबर को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) विषय पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों को एआई के आधुनिक उपकरणों, उनके शैक्षणिक उपयोग, शोध और नवाचार के साथ बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं के प्रति जागरूक एवं दक्ष बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी), आईईसी तथा वैद्यनाथ ज्वेलर्स, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।कार्यक्रम की संरक्षक एवं महाविद्यालय प्रबंध समिति की सचिव मेघना श्रीवास्तव तथा छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।आईआईसी अध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल तकनीकी विषय तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सभी संकायों के लिए उपयोगी और आवश्यक होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ महाविद्यालय में नवाचार और शोध की गुणवत्ता में सुधार करने में सहायक होंगे।सीएसजेएमयू इनोवेशन फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दिव्यांश शुक्ला ने कहा कि एआई टूल्स का सार्थक उपयोग स्टार्टअप, अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता को नई गति प्रदान कर सकता है। आईईसी के उपाध्यक्ष प्रो. विपिन चंद्र कौशिक ने नई शिक्षा नीति के संदर्भ में शिक्षकों के लिए डिजिटल दक्षता को आवश्यक बताया। वहीं, आईईसी के सह-संयोजक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सी.एम. सक्सेना ने कहा कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के बीच समन्वय वर्तमान समय की आवश्यकता है।डॉ. जतिन मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षकों का स्थान लेने का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी शैक्षणिक एवं शोध क्षमताओं को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने का साधन है। आयोजन समिति के सदस्य एवं वैद्यनाथ ज्वेलर्स के प्रमुख दिलीप कुमार अग्रवाल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक तकनीकी परिवर्तन संभव हैं।महाविद्यालय के आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. संदीप शुक्ला ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक शैक्षणिक बदलावों, करियर विकास और प्लेसमेंट की नई आवश्यकताओं को समझने में सहायता प्रदान करते हैं। प्रो. अंशु सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विभिन्न टूल्स, उनके प्रयोगात्मक उपयोग और वर्तमान समय में उनकी बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। डॉ. सुदर्शन त्रिपाठी ने कहा कि नवाचार शिक्षा का अभिन्न अंग है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बन सकती है।कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. इंद्राणी दुबे ने किया। आयोजन में आईईसी के साथ समन्वयक डॉ. गौतम हाल और डॉ. अनुपम दुबे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सीएसजेएमयू और डीबीएस कॉलेज के बीच हुआ एमओयू
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर और डीबीएस कॉलेज के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर रहा। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा, नवाचार और तकनीकी अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है। इस समझौते से दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग बढ़ने के साथ-साथ नवाचार एवं शोध गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।कार्यक्रम के अंत में उपप्राचार्य प्रो. सी.एम. सक्सेना ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. सुशील कुमार त्रिपाठी, प्रो. अर्चना सक्सेना, प्रो. सपना शुक्ला, डॉ. अनीता निगम, प्रो. प्रीति राठौड़, डॉ. रश्मि दुबे, डॉ. अनीता सिंह सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।इस आयोजन के माध्यम से डीबीएस कॉलेज ने उच्च शिक्षा में तकनीकी दक्षता, नवाचार आधारित शिक्षण और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

“कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा के क्षेत्र में एक उपयोगी साधन बन चुकी है। इसके प्रभावी उपयोग से शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने, शोध को प्रोत्साहित करने और नवाचार को नई दिशा देने में मदद मिल सकती है। शिक्षकों को बदलती तकनीक के अनुरूप अपनी डिजिटल दक्षता विकसित करनी चाहिए।” -प्रो. अनिल कुमार मिश्रा