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अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में कानपुर की बेटी मुदिता मिश्रा को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ आलेख सम्मान’

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विज्ञान भवन, नई दिल्ली में शोध पत्र प्रस्तुत कर बढ़ाया शहर का गौरव

 

कानपुर की बेटी एवं युवा हिन्दी शोधार्थी मुदिता मिश्रा ने अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए शहर का गौरव बढ़ाया है। नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में मुदिता मिश्रा को उनके शोध आलेख की उत्कृष्टता के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ आलेख सम्मान’ प्रदान किया गया।विज्ञान भवन नई दिल्ली में संपन्न इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय ‘भारत रत्न अटल : हिंदी, राष्ट्रवाद और सुशासन’ था। सम्मेलन का उद्घाटन भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू जी ने किया। इस अवसर पर विदेश राज्य मंत्री श्री पवित्रा मार्गेटा, वरिष्ठ राजनेता श्री के.सी. त्यागी, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अजय मिश्र टेनी, फिजी के उच्चायुक्त श्री जगन्नाथ सामी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री इंद्रेश कुमार, श्री रवि कुमार अय्यर, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे, प्रो. अशोक चौहान, श्री संजय पासवान एवं श्री विनोद बंसल सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की गरिमामयी उपस्थिति रही।मुदिता मिश्रा ने सम्मेलन में भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनके शोध आलेख को विद्वानों द्वारा सराहा गया तथा उत्कृष्टता के लिए उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ आलेख सम्मान’ से सम्मानित किया गया।उल्लेखनीय है कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी का कानपुर से विशेष संबंध रहा है। उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की थी। हिंदी भाषा के प्रति उनका अनुराग, संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में दिया गया ऐतिहासिक भाषण तथा राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। ऐसे में अटल जी के व्यक्तित्व, हिंदी के प्रति उनके समर्पण और राष्ट्रवादी विचारधारा पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कानपुर की बेटी मुदिता मिश्रा को मिला यह सम्मान शहर के लिए विशेष गौरव का विषय है।इस दो दिवसीय सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, कतर, इंडोनेशिया, मॉरीशस एवं श्रीलंका सहित विभिन्न देशों से हिंदी के विद्वानों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की। सम्मेलन में हिंदी भाषा के वैश्विक विस्तार, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद, सुशासन और अटल जी के विचारों पर व्यापक एवं सार्थक विमर्श हुआ। विभिन्न देशों से आए विद्वानों की सहभागिता ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष समृद्धि प्रदान की।मुदिता मिश्रा की यह उपलब्धि न केवल उनके शोध एवं साहित्यिक अभिरुचि का सम्मान है, बल्कि शहर के लिए भी गौरव का क्षण है। उनकी सफलता से युवा शोधार्थियों को हिंदी भाषा, साहित्य एवं भारतीय सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मुदिता मिश्रा छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से हिंदी विषय में शोध कर रही है।