
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। कानपुर नगर निगम के उद्यान विभाग में करोड़ों रुपये के 37 टेंडरों की प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। अलीगढ़ निवासी अमित उपाध्याय ने हलफनामे के जरिए 6 जुलाई को मुख्य अभियंता से शिकायत कर उद्यान अधीक्षक दिवाकर भास्कर समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई ई-टेंडर निर्धारित समय-सीमा के बेहद करीब अपलोड किए गए, जिससे दूसरे ठेकेदारों को बोली लगाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।शिकायत में टेंडर संदर्भ संख्या 1192/AA-2/25-26 का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि निर्धारित समय से पहले ही टेंडर अपलोड कर दिया गया। इसी तरह 25 जून को जारी किए गए करीब 33 टेंडरों में भी अंतिम समय से कुछ मिनट पहले प्रक्रिया शुरू किए जाने का दावा किया गया है।शिकायतकर्ता ने कुछ टेंडरों में बोली प्रक्रिया के दौरान अंतिम समय और रिकॉर्ड में दर्ज प्रक्रिया के समय के बीच अंतर का भी उल्लेख किया है। आरोप है कि कई टेंडरों में एक जैसा पैटर्न दिखाई देता है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि 37 में से 33 टेंडर एक ही कंप्यूटर से अपलोड किए गए।यशोदा नगर बाईपास स्थित ग्रीन बेल्ट में डेकोरेटिव लाइट और तिकोना पार्क के सुधार समेत कई कार्यों के टेंडरों का भी शिकायत में उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने बोली प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत और टेंडर पूलिंग की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है।वहीं उद्यान अधीक्षक दिवाकर भास्कर का कहना है कि संबंधित टेंडर प्रक्रिया को बाद में निरस्त कर दिया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने मामले की शिकायत नगर आयुक्त, जिलाधिकारी और शासन स्तर तक की है। अब उसने नगर निगम के टेंडर प्रकरणों की जांच कर रही एसआईटी के समक्ष भी इस मामले की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नगर आयुक्त ने दबा दी जांच
मामले में ठेकेदार ने साक्ष्यों के साथ शिकायत की तो नीचे से लेकर ऊपर तक के अफसर जांच के दायरे में आ गए। इसके बाद नगर निगम में इस शिकायत को दबा दिया गया। शिकायतकर्ता ने नगर आयुक्त से लेकर डीएम, सीएम और पीएम तक शिकायत की, लेकिन फाइल की जांच का हवाला देकर मामले को दबा दिया गया। अब नगर निगम में टेंडरों में गड़बड़ी की एसआईटी ने जांच शुरू की तो शिकायतकर्ता ने अपने मामले को भी एसआईटी से जांच करने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत करने के बाद से उसे लगातार धमकाया जा रहा है।
37 टेंडरों में एक जैसा पैटर्न होने का दावा
शिकायत में सबसे गंभीर सवाल 25 जून 2026 को 37 सिविल कार्यों को लेकर उठाया गया है। आरोप है कि इन टेंडरों को निर्धारित समय से पहले अपलोड किया गया और 37 में से 33 टेंडरों को एक ही कंप्यूटर से अपलोड किया गया। शिकायतकर्ता ने इसे टेंडर प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत की जांच का आधार बताया है।
रिकॉर्ड में कई कामों में एक ही फर्म सबसे कम बोलीदाता
इस पूरी टेंडर प्रक्रिया में खास बात यह है कि सड़क, नाली, पार्क, स्ट्रीट लाइट और अन्य सिविल कार्यों से जुड़े कई टेंडर हैं। कई मामलों में दो फर्मों ने बोली लगाई और रिकॉर्ड में बाबा आनंदेश्वर सप्लायर्स को न्यूनतम बोलीदाता दिखाया गया है। वहीं कुछ अन्य टेंडरों में दूसरी फर्में न्यूनतम बोलीदाता रही हैं।वहीं इस मामले में दिवाकर भास्कर का कहना है कि इस टेडर प्रक्रिया को बाद में कैंसिल कर दिया गया था।