
Pardarshi Vikas News Kanpur
अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के बड़े खुलासे के बीच मुख्य आरोपी ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ “डॉ. अली” ने गुरुवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वह पुलिस से बचते हुए एसीजेएम-6 की अदालत में पहुंचा, जहां उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए सिर पर टोपी और चेहरे पर मास्क लगा रखा था। अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थी और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि मुदस्सर 11वां आरोपी है।29 मार्च को रावतपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का मामला उजागर हुआ। जांच के दौरान कल्याणपुर के मेडलाइफ हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में भी संदिग्ध गतिविधियां मिलीं।जांच में सामने आया कि बिहार के रहने वाले 23 वर्षीय आयुष कुमार से करीब 6 लाख रुपये में किडनी खरीदी गई, जिसे बाद में एक महिला मरीज को लगभग 80 लाख रुपये में बेच दिया गया। आयुष की शिकायत के बाद पुलिस ने एक साथ कई अस्पतालों में छापेमारी कर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया।मुदस्सर अली सिद्दीकी, जो पेशे से ओटी टेक्नीशियन है, ऑपरेशन के दौरान मुख्य भूमिका निभाता था। वह सर्जिकल कट लगाकर किडनी निकालने और उसे दूसरे मरीज में ट्रांसप्लांट करने का काम करता था। वह कभी अकेले नहीं आता था, बल्कि उसके साथ एक डॉक्टर और दो सहायक होते थे।पुलिस के अनुसार, जनवरी से अब तक हुए कई ट्रांसप्लांट में उसकी भूमिका सामने आई है। अनुमान है कि कानपुर में 50 से अधिक अवैध ट्रांसप्लांट हुए, जिनमें से 30 से ज्यादा में उसकी सीधी भागीदारी थी।गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। पहले लोगों को साइबर फ्रॉड जैसे नेटवर्क में जोड़ा जाता था, फिर उन्हें छोटे-छोटे टास्क देकर लालच दिया जाता था। बाद में कर्ज और दबाव के जरिए उन्हें किडनी डोनेट करने के लिए मजबूर किया जाता था।डोनर्स पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाता था और उन्हें काउंसलिंग के जरिए राजी किया जाता था। पूरा सिंडिकेट टेलीग्राम ग्रुप के जरिए संचालित होता था। पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
देशभर में फैला था नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लखनऊ और दिल्ली से डॉक्टरों की टीम बुलाई जाती थी। देश के अलग-अलग राज्यों से युवकों को लालच और धोखे से इस गिरोह में फंसाया जाता था। इस मामले में आहूजा हॉस्पिटल की डॉ. प्रीति आहूजा, डॉ. सुरजीत आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और एजेंट शिवम अग्रवाल समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरोह का सरगना डॉ. रोहित बताया गया है, जिसे हाल ही में गिरफ्तार किया गया।