
पारदर्शी विकास ब्यूरो देवरिया। आज के दौर में जब अधिकांश युवा आधुनिक जीवनशैली और मोबाइल की दुनिया में खोते जा रहे हैं, ऐसे समय में देवरिया के पहलवान शिवकुमार अखाड़े की परंपरा को जीवित रखते हुए युवाओं को नई दिशा देने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। बचपन से कुश्ती के प्रति जुनून रखने वाले शिवकुमार अपने परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के दम पर न केवल स्वयं एक सफल पहलवान बने, बल्कि अब सैकड़ों बच्चों और युवाओं के जीवन को संवारने में जुटे हैं।हर सुबह और शाम उनके अखाड़े में युवाओं की भीड़ जुटती है, जहां उन्हें दौड़, दंड-बैठक, व्यायाम और कुश्ती की बारीकियां सिखाई जाती हैं। शिवकुमार का मानना है कि कुश्ती केवल ताकत का खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संयम, अनुशासन और स्वस्थ जीवन का आधार है।स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके प्रयासों से कई युवा नशे और गलत संगत से दूर होकर खेलों की ओर आकर्षित हुए हैं। उनके मार्गदर्शन में तैयार हो रहे कई खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने का सपना संजोए पहलवान शिवकुमार आज देवरिया के युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। उनका समर्पण यह संदेश देता है कि अखाड़े की मिट्टी में केवल पहलवान ही नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र और उज्ज्वल भविष्य भी तैयार होते हैं।