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शंखनाद के साथ चारधाम यात्रा शुरू, तीन में गैर-सनातनियों के लिए शर्तें

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सब हेडिंग-दो तीर्थों में देना होगा हलफनामा और एक में करना होगा पंचगव्य का सेवन

देहरादून। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। पहली पूजा प्रधानमंत्री मोदी के नाम से की गई। इस बार सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। साथ ही मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों पर प्रतिबंध लगाया गया है। महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में तीन धामों में गैर-सनातनियों के प्रवेश के लिए विशेष शर्तें एवं नियम लागू हैं जबकि एक धाम में सभी का स्वागत किया जाएगा। यात्रा के लिए अब तक लाखों श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
इस साल 3 धामों में गैर सनातनियों के प्रवेश को लेकर अलग-अलग शर्तें हैं। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने दोनों मंदिर परिसरों में प्रवेश के लिए सनातन धर्म के प्रति आस्था का हलफनामा अनिवार्य किया है।
उत्तरकाशी जिले में मौजूद गंगोत्री और यमुनोत्री दोनों धामों में पहली पूजा प्रधानमंत्री मोदी के नाम से की गई। गंगोत्री के कपाट खुलने के समय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी वहां मौजूद रहे जहां उन्होंने यात्रा की सफलता और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
धार्मिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगोत्री मंदिर के कपाट अपराह्न करीब 12:15 बजे और यमुनोत्री मंदिर के कपाट 12:35 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। CM धामी ने कहा कि उत्तराखंड के चारधाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
इस साल 3 धामों में गैर सनातनियों के प्रवेश को लेकर अलग-अलग शर्तें हैं। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने दोनों मंदिर परिसरों में प्रवेश के लिए सनातन धर्म के प्रति आस्था का हलफनामा अनिवार्य किया है। वहीं गंगोत्री मंदिर समिति ने पंचगव्य (गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी) ग्रहण करने के बाद ही धाम में एंट्री की अनुमति देने की घोषणा की है।
दूसरी ओर यमुनोत्री मंदिर समिति ने अलग रुख अपनाते हुए बिना जाति-धर्म पूछे श्रद्धाभाव से आने वाले सभी श्रद्धालुओं के स्वागत का निर्णय लिया है।
इस बार चारों धामों के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों के इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन लगाया गया है। पिछले साल चारधाम यात्रा में 51 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। वहीं इस साल अब तक करीब 19 लाख श्रद्धालु ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
उत्तराखंड के चारधामों में शामिल अन्य दो धाम-रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को जबकि चमोली जिले के बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। बता दें कि ये चारों धाम सर्दियों में भारी बर्फबारी और भीषण ठंड के कारण हर साल अक्टूबर-नवंबर में बंद कर दिए जाते हैं। ये धाम अप्रैल-मई में दोबारा खोले जाते हैं।
इंसेट बॉक्स
उत्तराखंड में चुनावी तैयारियां भी शुरी
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के साथ विधानसभा चुनाव की भी तैयारी शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी शैलजा कुमारी कुमाऊं के सफल दौरे के बाद गढ़वाल में ‘चारधाम यात्रा’ के जरिए कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने के साथ-साथ चुनावी शंखनाद की तैयारी में हैं। बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन के साथ ही कार्यकर्ता सम्मेलन और बैठकें भी होंगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, शैलजा का यह दौरा 27 अप्रैल से शुरू होगा। इसकी शुरुआत ऋषिकेश से होगी, जहां से वे दल-बल संग गढ़वाल के पहाड़ी जिलों की ओर रवाना होंगी। इस आयोजन को आध्यात्मिक आस्था के साथ ही साथ सियासी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। उनका दौरा तीन मई को टिहरी के चंबा में कार्यकर्ता सम्मेलन के साथ पूरा होगा।
गौरतलब है कि एक ही महीने में यह प्रदेश प्रभारी शैलजा का दूसरा उत्तराखंड दौरा होगा। इससे पहले आठ अप्रैल को उन्होंने कुमाऊं मंडल के रुद्रपुर से चार दिवसीय दौरे की शुरुआत की थी। उस दौरान यूएसनगर, नैनीताल, हरिद्वार, मसूरी और देहरादून में हुए कार्यकर्ता सम्मेलनों में भी हिस्सा लिया था। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ‘चारधाम यात्रा’ का कार्यक्रम अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को दिल्ली भेज दिया है। फिलहाल हरी झंडी मिलने का इंतजार है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह कार्यक्रम लगभग तय है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दो दिनी धराली दौरे के बाद शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा से मुलाकात की। इस दौरान आपदाग्रस्त क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति समेत विभिन्न राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हुई। हरीश रावत भले ही अर्जित अवकाश पर रहे, इसके बावजूद उनकी सक्रियता बढ़ती नजर आ रही है। हाल ही में अपने आवास पर ‘खीरा-खरबूज पार्टी’ के बाद उनका अचानक दिल्ली पहुंचना सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि 27 अप्रैल से शुरू हो रहे गढ़वाल के दौरे के साथ हरीश रावत भी सक्रिय भूमिका में नजर आ सकते हैं।