
PARDARSHI VIKASH NEWS विकसित हो रहा राम मंदिर परिसर अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का भी उदाहरण बन रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे परिसर में हरित क्षेत्र, जल संरक्षण और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है।ट्रस्ट के अनुसार, कुल अधिग्रहीत भूमि का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा हरियाली और खुले क्षेत्र के रूप में सुरक्षित रखा गया है, जबकि केवल 30 से 35 प्रतिशत भाग में निर्माण कार्य किया गया है। परिसर में रामायणकालीन पौधों, पंचवटी, नक्षत्र वाटिका और विभिन्न फलदार वृक्षों का रोपण किया गया है। भूमि अधिग्रहण के दौरान मौजूद कई पुराने पेड़ों को काटने के बजाय दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया, जिससे हरित क्षेत्र संरक्षित रह सके।जल संरक्षण के लिए परिसर में दो बड़े जलाशय विकसित किए जा रहे हैं। इनमें कमल सरोवर और गहरे जल संचयन क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा दो आधुनिक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिनसे शोधित जल का उपयोग बागवानी और हरित क्षेत्रों के रखरखाव में किया जाएगा। वर्षा जल संचयन के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और 40 रिचार्ज पिट भी बनाए गए हैं।स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अलग-अलग संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन व्यवस्थाओं के जरिए राम मंदिर परिसर धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास का भी एक आदर्श मॉडल बनकर उभर रहा है।