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प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मजबूत करने के लिए राज्यस्तरीय मंथन

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पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। उत्तर प्रदेश फोर्सेस  की ओर से प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा  को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दो दिवसीय राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन लखनऊ के होटल बेबियन में किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ बाल विकास परियोजना अधिकारी  जिया श्याम मौर्य ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 45 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के नौ जिलों में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों की वर्तमान स्थिति और ECCE से जुड़े मुद्दों पर किए गए अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि आंगनवाड़ी व्यवस्था में मौजूद चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तथा पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं, ताकि बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा सके। सीडीपीओ जिया श्याम मौर्य ने कहा कि बच्चों के हित में विभिन्न संस्थाओं को एक मंच पर लाकर सामूहिक कार्ययोजना तैयार करना सराहनीय पहल है। उन्होंने ग्राम पंचायतों को बाल विकास योजनाओं से जोड़ते हुए स्थानीय स्तर पर प्रभावी योजना तैयार करने पर बल दिया। वहीं, राजदेव चतुर्वेदी ने ECCE के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। नेशनल फोर्सेस के भूपेंद्र शांडिल्य ने कहा कि अध्ययन रिपोर्ट में सामने आई सिफारिशों को सरकार एवं आईसीडीएस विभाग तक पहुंचाया जाएगा। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने छह वर्ष तक की आयु को बच्चों के मानसिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस अवधि में उचित पोषण, सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण देखभाल उपलब्ध कराना आवश्यक है, अन्यथा बच्चों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है कार्यक्रम में जे.पी. शर्मा, विनोद सिन्हा, मनीष कुमार सिंह,तेज राम भारती कंसल्टेंट रिजवाना सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य स्तर पर ECCE को प्रभावी बनाने के लिए साझा रणनीति और सामुदायिक कार्ययोजना तैयार करना रहा।