
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ/अमेठी। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अनिश्चितता का दौर समाप्त हो गया है। सोमवार को कैबिनेट मीटिंग में हुए निर्णय के बाद पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव 2027के बाद होने के आसार बढ़ गये हैं।प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की ग्राम प्रधान संगठन की मांग पर योगी सरकार ने अभी तक कोई विचार नहीं किया है प्रशासक कौन नियुक्त होगा,इस बात को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। कैबिनेट द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय किए जाने के साथ ही पंचायत चुनाव की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। आयोग की सिफारिशें प्राप्त होने, सीटों का आरक्षण तय किए जाने और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव संपन्न कराने की प्रक्रिया में ही नौ महीने से अधिक समय लगेंगे। जब तक ये प्रक्रियाएं पूरी होंगी, उस समय प्रदेश में विधान सभा चुनाव के लिए मतदान का समय रहेगा। माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अब विधान सभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकेंगे। आयोग के गठन का निर्णय लिए जाने के साथ ही सरकार अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में आयोग के गठन को लेकर चल रही सुनवाई में अपना पक्ष रखेगी, सुनवाई की तिथि 19 मई निर्धारित है। वर्ष 2021 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 15, 19, 26 और 29 अप्रैल को चार चरणों में कराए गए थे। दो मई को मतों की गिनती हुई थी। 26 मई को ग्राम पंचायतों की पहली बैठक हुई थी। 11 जुलाई को जिला पंचायतों और 19 जुलाई को क्षेत्र पंचायतों की पहली बैठकें हुईं थीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक पंचायत चुनाव से पूर्व ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाना जरूरी है। लिहाजा आयोग के गठन के लिए सोमवार को कैबिनेट ने स्वीकृति दी। पिछड़ा वर्ग आयोग को सरकार को संस्तुतियां करने के लिए छह माह का समय दिया गया है। आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सीटों का आरक्षण तय करने के लिए विभाग को दो महीने का समय चाहिए। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 35 से 40 दिन चाहिए। इन तीनों प्रक्रियाओं में ही नौ माह से अधिक समय निकल जाएगा। तब तक फरवरी 2026 आ जाएगा। फरवरी 2026 में विधान सभा चुनाव के लिए मतदान की तिथियां संभावित है। मार्च में मतों की गणना और उसके बाद सरकार का गठन होगा। वर्ष 2022 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में 10 फरवरी से सात मार्च के बीच सात चरणों में मतदान हुआ था और 10 मार्च को मतगणना हुई थी।
अब एक साल और कसरत करेंगे प्रधान पद के दावेदार
पिछले एक साल से चुनाव लडने की तैयारी में लगे ग्राम प्रधान और जिला पंचायत सदस्य के दावेदारों को कैबिनेट का फैसला आने से जोर का झटका लगा है।अब तक की गई सारी तैयारियां बेकार हो गई हैं।अब दावेदारों को कम से कम एक साल और कसरत करनी पड़ेगी। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की कार्यवाहियां फरवरी के पहले पूरी नहीं हो पाएंगी। फ़रवरी/मार्च 2027में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो जाएगी।