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गल्ला मंडी की करोड़ों की संपत्ति बचाने की मांग

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पारदर्शी विकास न्यूज़  सुलतानपुर। शहर के मध्य स्थित गल्ला मंडी अमेठी बाड़ा और प्रतापगंज की करोड़ों रुपये की बेशकीमती संपत्ति को लेकर व्यापारियों में चिंता का माहौल है। नगरपालिका परिषद सुलतानपुर के किरायेदार व्यापारियों ने अधिशासी अधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर संपत्ति की सुरक्षा और न्यायालय में लंबित मामले की प्रभावी पैरवी कराने की मांग की है।प्रार्थनापत्र में व्यापारियों ने बताया कि गल्ला मंडी की संपत्ति उत्तर प्रदेश शासन की नजूल संपत्ति है, जिसका पट्टा वर्ष 1930 में नगरपालिका सुलतानपुर के पक्ष में किया गया था। इसके बाद नगरपालिका ने व्यापारियों को व्यवसाय के लिए दुकानें आवंटित कीं। वर्तमान में सैकड़ों व्यापारी नगरपालिका के किरायेदार के रूप में अपना कारोबार कर रहे हैं।व्यापारियों के अनुसार, संपत्ति के स्वामित्व को लेकर बिशम्भर दयाल अग्रवाल आदि बनाम राज्य उत्तर प्रदेश व नगरपालिका परिषद सुलतानपुर का दीवानी मुकदमा न्यायालय में चला। प्रार्थनापत्र में संबंधित न्यायिक निर्णयों और अपीलों का उल्लेख करते हुए संपत्ति पर नगरपालिका और शासन के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई है।व्यापारियों ने आरोप लगाया कि नगरपालिका की ओर से दायर द्वितीय अपील संख्या 608/83, नगरपालिका सुलतानपुर आदि बनाम बिशम्भर दयाल अग्रवाल आदि, 31 जुलाई 2025 को अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण अदम पैरवी में खारिज हो गई। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के विरुद्ध तत्काल रेस्टोरेशन प्रार्थनापत्र दाखिल कर प्रभावी कानूनी पैरवी आवश्यक है।प्रार्थनापत्र में अधिशासी अधिकारी से मांग की गई है कि उच्च न्यायालय में नियुक्त अधिवक्ता के माध्यम से रेस्टोरेशन की कार्रवाई कराई जाए और मामले की सजगता से पैरवी सुनिश्चित की जाएव्यापारियों का कहना है कि संपत्ति से जुड़े विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, ताकि नगरपालिका के किरायेदारों के व्यवसाय और उनके हितों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने प्रशासन से समय रहते आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।